उदयपुर ने अक्टूबर 2025 की शुरुआत में व्यस्त फतहपुरा चौराहे पर यातायात की भीड़ के प्रबंधन के लिए AI-आधारित यातायात सिग्नल प्रणाली पायलट परियोजना के रूप में शुरू की। उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और सेंसर सभी चार लेन की वास्तविक समय में निगरानी करते हैं; AI सबसे अधिक भीड़भाड़ वाली लेन को जरूरत के अनुसार हरी बत्ती देता है। यदि कोई लेन खाली हो, तो 5 सेकंड में सिग्नल बदलता है। यह एम्बुलेंस व दमकल के सायरन को भी पहचानता है और उन्हें तुरंत हरी बत्ती देता है। पायलट की लागत लगभग ₹10 लाख प्रति चौराहा है। सफल होने पर इसे उदयपुर के अन्य प्रमुख चौराहों एवं राजस्थान के अन्य नगरों में लागू किया जाएगा।
उदयपुर ने फतहपुरा चौराहे पर AI आधारित यातायात सिग्नल प्रणाली की पायलट परियोजना शुरू की
उदयपुर ने अक्टूबर 2025 की शुरुआत में व्यस्त फतहपुरा चौराहे पर यातायात की भीड़ के प्रबंधन के लिए AI-आधारित, जरूरत के हिसाब से बदलने वाली यातायात सिग्नल प्रणाली पायलट परियोजना के रूप में शुरू की। उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और सेंसर चारों लेन की रियल-टाइम निगरानी करते हैं; AI सबसे अधिक भीड़भाड़ वाली लेन को स्थिति के हिसाब से हरी बत्ती देता है। यदि कोई लेन खाली हो, तो 5 सेकंड में सिग्नल बदलता है। यह एम्बुलेंस व दमकल के सायरन भी पहचानता है और उन्हें तुरंत हरी बत्ती देता है। पायलट की लागत लगभग ₹10 लाख प्रति चौराहा है। सफल होने पर इसे उदयपुर के अन्य प्रमुख चौराहों एवं राजस्थान के अन्य नगरों में विस्तारित किया जाएगा।
मुख्य तथ्य
- उदयपुर ने फतहपुरा चौराहे पर AI-आधारित, यातायात के अनुसार बदलने वाली सिग्नल प्रणाली शुरू की।
- उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और सेंसर सभी चार लेन की वास्तविक समय में निगरानी करते हैं।
- AI सबसे अधिक भीड़ वाली लेन को अपने-आप हरी बत्ती देता है।
- प्रणाली एम्बुलेंस और दमकल की गाड़ियों के सायरन पहचानकर तुरंत हरी बत्ती देती है।
- पायलट की लागत लगभग ₹10 लाख प्रति चौराहा है।
- पायलट सफल होने के बाद स्मार्ट सिटी मिशन के तहत राजस्थान भर में इसका विस्तार होगा।
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उदयपुर के फतेहपुरा चौराहे पर AI-संचालित यातायात संकेत पायलट की प्रति चौराहा अनुमानित लागत क्या है?
पायलट की लागत प्रति चौराहा लगभग 10 लाख रुपये है। यह प्रणाली एम्बुलेंस और दमकल की सायरन भी पहचानती है और तत्काल हरी बत्ती प्रदान करती है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उदयपुर में AI-आधारित अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली पायलट कहाँ और कब शुरू की गई?
यह AI-आधारित अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली अक्टूबर 2025 की शुरुआत में उदयपुर के व्यस्त फतहपुरा चौराहे पर पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई।
उदयपुर की AI यातायात सिग्नल प्रणाली हरी बत्ती देने का फैसला कैसे लेती है?
उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और सेंसर चारों लेन पर रियल-टाइम नज़र रखते हैं। AI यातायात घनत्व का विश्लेषण कर जिस लेन में सबसे ज़्यादा भीड़ हो उसे हरी बत्ती दे देता है। यदि कोई लेन खाली हो, तो 5 सेकंड में सिग्नल बदल जाता है।
एम्बुलेंस और दमकल जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए यह प्रणाली क्या व्यवस्था करती है?
AI प्रणाली एम्बुलेंस और दमकल के सायरन पहचानने के लिए प्रोग्राम की गई है। पहचान होते ही यह सामान्य सिग्नल चक्र को रोककर आपातकालीन वाहनों को तुरंत हरी बत्ती देती है।
AI यातायात सिग्नल पायलट की अनुमानित लागत क्या है और विस्तार की क्या योजना है?
पायलट की लागत लगभग ₹10 लाख प्रति चौराहा है। फतहपुरा पायलट सफल होने पर इस AI अनुकूली यातायात सिग्नल प्रणाली को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत राजस्थान भर में लागू करने की योजना है।
RPSC RAS तैयारी के लिए इस पायलट का क्या महत्व है?
यह परियोजना राजस्थान में नगरीय शासन, स्मार्ट सिटी पहल और तकनीक पर आधारित सार्वजनिक प्रशासन से संबंधित है। यह स्थानीय शासन में AI के उपयोग और केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन से इसके जुड़ाव को दिखाती है।
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