नवंबर 2025 में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू किया गया डम्पसाइट रेमिडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP), 14 मार्च 2026 के करेंट अफेयर्स में प्रमुखता से चर्चा में रहा। यह एक वर्षीय लक्षित पहल है, जिसका उद्देश्य सितंबर 2026 तक भारत के सभी शहरी कचरा डम्पसाइट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है।

भारत में लगभग 2,476 पहचाने गए डम्पसाइट हैं जिनमें करीब 25 करोड़ मीट्रिक टन पुराना कचरा लगभग 15,000 एकड़ में फैला है। DRAP में 202 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के 214 प्रमुख डम्पसाइट को प्राथमिकता दी गई है, जहां करीब 80% कचरा केंद्रित है। कार्यक्रम में बायोमाइनिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है — कचरे को पंक्तियों में फैलाना, हवा के संपर्क में रखना और सूक्ष्मजीवों से उपचार करना। केंद्र सरकार ₹550 प्रति टन की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग पार्क, सामुदायिक सुविधाओं और कचरा प्रबंधन अवसंरचना के लिए किया जाता है। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे शहरों में पुराने कचरे से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।