ट्रम्प प्रशासन ने 66 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका की वापसी की घोषणा की है, जो बहुपक्षीय कूटनीति से बड़े स्तर पर पीछे हटने का संकेत देता है। इस सूची में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), UNFCCC, IPCC और IRENA शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत और फ्रांस ने मिलकर की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की संयुक्त पहल पर ISA का गठन हुआ था। मार्च 2026 तक ISA से 126 देश जुड़े हैं और यह संगठन 2030 तक सौर ऊर्जा में 10 खरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को जुटाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
अमेरिका का ISA से हटना भारत की जलवायु बहुपक्षीयता और वैश्विक दक्षिण में स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व पर सीधा प्रभाव डालता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम को स्वीकार करते हुए कहा कि नई दिल्ली बहुपक्षीय जलवायु सहयोग को आगे बढ़ाती रहेगी।
UNFCCC और IPCC से अमेरिका की वापसी पेरिस समझौते की रूपरेखा को और कमजोर करती है, क्योंकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा संचयी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है। IRENA, जिसका मुख्यालय अबू धाबी में है, नवीकरणीय ऊर्जा नीति समन्वय की एक प्रमुख संस्था थी।
यह घटना RPSC अभ्यर्थियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंध, पर्यावरण शासन और भारत की विदेश नीति को समझने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
