प्रकाशित: 15 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
RBI ने डिजिटल धोखाधड़ी पर मुआवजे का ढांचा प्रस्तावित किया: अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के पीड़ितों को ₹25,000 तक
Aसीधा उत्तर
RBI के फरवरी 2026 के मसौदा ढांचे में ₹50,000 तक के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन से पीड़ित लोगों को ₹25,000 तक या नुकसान का 85%, जो भी कम हो, मुआवजा देने का प्रस्ताव है; इसमें UPI, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड भुगतान शामिल हैं। यह 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और FY24 में UPI धोखाधड़ी के 13.42 लाख मामलों से जुड़ा है।
फरवरी 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक मसौदा ढांचा जारी किया, जिसमें कम राशि के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के पीड़ितों को ₹25,000 तक अनिवार्य मुआवजा देने का प्रस्ताव है। यह डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी में ग्राहक की देयता वाले मॉडल से साझा जिम्मेदारी वाले ढांचे की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव है।
प्रस्तावित नियमों के तहत, ₹50,000 तक के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में पीड़ित ग्राहक वास्तविक नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) का दावा कर सकते हैं, बशर्ते धोखाधड़ी की सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर दी जाए। यह ढांचा UPI, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड-नॉट-प्रेज़ेंट लेनदेन पर लागू होगा। बैंक, लाभार्थी बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएं RBI और NPCI द्वारा प्रबंधित साझा मुआवजा कोष में योगदान देंगी। मसौदा निर्देशों का 1 जुलाई 2026 से लागू होना प्रस्तावित है, और 6 अप्रैल 2026 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया आमंत्रित है।
FY 2023–24 में UPI धोखाधड़ी के मामले 13.42 लाख थे, जिनमें लगभग ₹1,087 करोड़ का नुकसान हुआ। जन धन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान अपनाने वाले राजस्थान के लिए यह ढांचा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मूल्यांकन कीजिए कि RBI का 2026 मसौदा डिजिटल धोखाधड़ी क्षतिपूर्ति ढांचा छोटी राशि के अनधिकृत लेनदेन पर उपभोक्ता दायित्व को कैसे नए सिरे से परिभाषित करता है और यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान तंत्र में भरोसा कैसे मज़बूत करता है।
उत्तर (50 शब्द):
RBI का फरवरी 2026 मसौदा ₹50,000 तक के अनधिकृत लेनदेन की पांच दिनों में रिपोर्ट होने पर ₹25,000 या हानि का 85% (जो कम हो) क्षतिपूर्ति प्रस्तावित करता है। यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड भुगतान पर लागू यह ढांचा 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और 2023-24 के 13.42 लाख यूपीआई धोखाधड़ी मामलों (₹1,087 करोड़) से निपटने का प्रयास करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
RBI के डिजिटल धोखाधड़ी मुआवजा ढांचे में क्या प्रस्ताव है और यह कब से प्रभावी होगा?
RBI ने फरवरी 2026 में यह मसौदा ढांचा जारी किया। इसमें ₹50,000 तक के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रस्ताव है और यह 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।
इस ढांचे के तहत मुआवजे की राशि कैसे तय होगी?
₹50,000 तक के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के पीड़ितों को ₹25,000 या नुकसान का 85% — जो भी कम हो — मुआवजा मिलेगा।
इस ढांचे में किस तरह के डिजिटल भुगतान शामिल हैं?
इस ढांचे में UPI भुगतान, इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन और कार्ड-आधारित (डेबिट और क्रेडिट) लेनदेन — यानी भारत के तीन प्रमुख डिजिटल भुगतान माध्यम — शामिल हैं।
UPI धोखाधड़ी के कितने मामलों के कारण यह ढांचा बनाया गया?
FY2023-24 में रिपोर्ट हुए 13.42 लाख UPI धोखाधड़ी मामलों को देखते हुए यह ढांचा बनाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय अपराध में तेज वृद्धि दिखाता है।
मुआवजा दावों के निपटारे की जिम्मेदारी किस पर होगी?
बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं पर मुआवजा दावों के निपटारे की जिम्मेदारी होगी। अंतिम अधिसूचना से पहले मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए उपलब्ध है।