फरवरी 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक मसौदा ढांचा जारी किया, जिसमें कम राशि के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के पीड़ितों को ₹25,000 तक अनिवार्य मुआवजा देने का प्रस्ताव है। यह डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी में ग्राहक की देयता वाले मॉडल से साझा जिम्मेदारी वाले ढांचे की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव है।

प्रस्तावित नियमों के तहत, ₹50,000 तक के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में पीड़ित ग्राहक वास्तविक नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) का दावा कर सकते हैं, बशर्ते धोखाधड़ी की सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर दी जाए। यह ढांचा UPI, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड-नॉट-प्रेज़ेंट लेनदेन पर लागू होगा। बैंक, लाभार्थी बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएं RBI और NPCI द्वारा प्रबंधित साझा मुआवजा कोष में योगदान देंगी। मसौदा निर्देशों का 1 जुलाई 2026 से लागू होना प्रस्तावित है, और 6 अप्रैल 2026 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया आमंत्रित है।

FY 2023–24 में UPI धोखाधड़ी के मामले 13.42 लाख थे, जिनमें लगभग ₹1,087 करोड़ का नुकसान हुआ। जन धन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान अपनाने वाले राजस्थान के लिए यह ढांचा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।