30 अक्टूबर 2025 की यह समसामयिकी भारत के बिजली क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्ज करती है। भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावाट के स्तर को पार कर 500.89 गीगावाट तक पहुंच गई। इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की क्षमता 256.09 गीगावाट रही, जो कुल स्थापित क्षमता का 51% है। इसका सीधा अर्थ है कि बिजली क्षमता के ढांचे में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोत अब आधे से अधिक हिस्से पर पहुंच चुके हैं।
कॉप26 में घोषित पंचामृत लक्ष्य के तहत भारत ने 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा था। 500.89 गीगावाट की कुल क्षमता में 256.09 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता के साथ यह लक्ष्य 2030 की समयसीमा से 5 साल पहले पूरा हो गया। परीक्षा की दृष्टि से यहां दो संख्याएं खास हैं: कुल स्थापित बिजली क्षमता 500.89 गीगावाट और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 256.09 गीगावाट यानी 51%।
प्रीलिम्स में यह तथ्य ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से जुड़े प्रत्यक्ष प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा दिशा, जलवायु प्रतिबद्धताओं और आर्थिक विकास में बिजली क्षेत्र की भूमिका से जोड़कर लिखा जा सकता है। स्टैटिक जीके से इसका संबंध ऊर्जा मिश्रण, जीवाश्म और गैर-जीवाश्म स्रोतों के अंतर, स्थापित क्षमता की अवधारणा और जलवायु लक्ष्यों से बनता है। इस उपलब्धि का महत्व केवल 500 गीगावाट का आंकड़ा पार करने में नहीं है, बल्कि इस बात में भी है कि गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50% की सीमा से ऊपर पहुंची और पंचामृत लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ।
