पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो 1 अप्रैल 2026 से पूर्णतः प्रभावी होंगे। ये नियम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लेते हैं और भारत की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण सुधार स्रोत पर कचरे को अनिवार्य रूप से चार श्रेणियों में अलग करना है — कचरा पैदा करने वालों को कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना होगा: (1) गीला अपशिष्ट (जैव-अपघटनीय), (2) सूखा अपशिष्ट (पुनर्चक्रणयोग्य), (3) स्वच्छता अपशिष्ट, और (4) विशेष देखभाल अपशिष्ट (पेंट, बल्ब, दवाएं, बैटरी)। बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों — जो कुल ठोस अपशिष्ट उत्पादन के लगभग 30% के लिए जिम्मेदार हैं — को जवाबदेह बनाया गया है। नियमों में सर्कुलर इकॉनमी और विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी के सिद्धांतों को शामिल किया गया है। राजस्थान के स्मार्ट सिटी मिशन, शहरी शासन सुधारों और स्वच्छ भारत मिशन प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में ये नियम RPSC RAS उम्मीदवारों के लिए विशेष महत्व के हैं।