उत्तराखंड ने इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 डिजिटल पुलिसिंग रैंकिंग में 93.46 अंकों के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। हरियाणा 93.41 अंकों के साथ दूसरे और असम 93.16 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ये रैंकिंग गृह मंत्रालय (MHA) के तहत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने जारी की।

ICJS 2.0 भारत सरकार की एक प्रमुख ई-गवर्नेंस पहल है, जो आपराधिक न्याय तंत्र के पाँच स्तंभों — पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, कारागार और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं — के बीच वास्तविक समय में डेटा साझा करने की व्यवस्था को जोड़ती है। यह प्रणाली "एक डेटा, एक प्रविष्टि" के सिद्धांत पर काम करती है।

केंद्र सरकार ने ICJS परियोजना के चरण 2 को 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए मंजूरी दी, ताकि आपराधिक न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली को और गहराई से जोड़ा जा सके। ICJS 2.0 सुरक्षित क्लाउड-आधारित अवसंरचना और उन्नत अनुप्रयोगों पर आधारित है, और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी सहयोग से लागू करता है।

उत्तराखंड का प्रदर्शन डिजिटल पुलिसिंग बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश, समय पर FIR डिजिटाइजेशन और ICJS प्लेटफॉर्म में डेटा फीडिंग को दिखाता है।