प्रकाशित: 8 जनवरी 2026NCRB/MHAशासन
ICJS 2.0 डिजिटल पुलिसिंग रैंकिंग में उत्तराखंड शीर्ष पर; हरियाणा और असम पीछे
उत्तराखंड ने इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 डिजिटल पुलिसिंग रैंकिंग में 93.46 अंकों के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। हरियाणा 93.41 अंकों के साथ दूसरे और असम 93.16 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ये रैंकिंग गृह मंत्रालय (MHA) के तहत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने जारी की।
ICJS 2.0 भारत सरकार की एक प्रमुख ई-गवर्नेंस पहल है, जो आपराधिक न्याय तंत्र के पाँच स्तंभों — पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, कारागार और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं — के बीच वास्तविक समय में डेटा साझा करने की व्यवस्था को जोड़ती है। यह प्रणाली "एक डेटा, एक प्रविष्टि" के सिद्धांत पर काम करती है।
केंद्र सरकार ने ICJS परियोजना के चरण 2 को 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए मंजूरी दी, ताकि आपराधिक न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली को और गहराई से जोड़ा जा सके। ICJS 2.0 सुरक्षित क्लाउड-आधारित अवसंरचना और उन्नत अनुप्रयोगों पर आधारित है, और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी सहयोग से लागू करता है।
उत्तराखंड का प्रदर्शन डिजिटल पुलिसिंग बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश, समय पर FIR डिजिटाइजेशन और ICJS प्लेटफॉर्म में डेटा फीडिंग को दिखाता है।
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6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयप्रकारपहलविषयराष्ट्रीयपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतNCRB/MHA
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ICJS 2.0 क्या है?
ICJS 2.0 (इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) एक उन्नत ई-गवर्नेंस पहल है, जो पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, कारागार और फोरेंसिक लैब के बीच तुरंत डेटा साझा करने की सुविधा देती है।
ICJS के लिए नोडल एजेंसी कौन सी है?
गृह मंत्रालय (MHA) के तहत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ICJS कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।
ICJS में 'एक डेटा, एक प्रविष्टि' सिद्धांत क्या है?
इसका अर्थ है कि आपराधिक न्याय प्रणाली में किसी भी स्तर पर एक बार दर्ज की गई जानकारी तुरंत बाकी सभी एजेंसियों से साझा हो जाती है।
ICJS चरण 2 की आधिकारिक अवधि क्या है?
केंद्र सरकार ने ICJS परियोजना के चरण 2 को 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए मंज़ूरी दी, जो सुरक्षित क्लाउड-आधारित बुनियादी ढाँचे और बेहतर ऐप्लिकेशनों पर आधारित है।
ICJS में आपराधिक न्याय तंत्र के पाँच स्तंभ कौन से हैं?
पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, कारागार और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं पाँच स्तंभ हैं।