21 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कोप्ये में उत्तर मैसीडोनिया की राष्ट्रपति डॉ. गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा की मौजूदगी में वहां की संसद के सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत उत्तर मैसीडोनिया को दूर का देश नहीं, बल्कि स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य के निर्माण में एक अहम स्तंभ मानता है। दोनों पक्षों के संबंध दो हजार वर्ष से भी पुराने हैं। इस क्षेत्र के योद्धाओं और व्यापारियों की ऐतिहासिक यात्राओं ने व्यापार, दर्शन और कला के रास्ते खोले तथा दोनों की शुरुआती सभ्यताओं को जोड़ा। संबोधन का प्रमुख विषय लोकतंत्र था, जिसे राष्ट्रपति ने दोनों देशों का साझा विश्वास बताया। उनके अनुसार संसदें जनता की आज़ादी की रक्षा करती हैं, कानून बनाती हैं और राष्ट्रीय चेतना को सामने रखती हैं। इसी कारण संसदीय कूटनीति अहम है। सांसदों के बीच बातचीत और संवाद से ऐसा संस्थागत भरोसा बनता है जो राजनीतिक दौर बदलने के बाद भी कायम रहता है। उन्होंने युवा सांसदों से नई दिल्ली और स्कोप्ये के बीच यात्रा करने तथा संसदीय कामकाज और लोक नीति निर्माण की अच्छी कार्य-पद्धतियां साझा करने का आग्रह किया। व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व की राजनीतिक और आर्थिक ताकत का केंद्र बदल रहा है। भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को हाशिए का क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के उभरते क्षेत्र के रूप में देखता है। उत्तर मैसीडोनिया इस बदलाव के केंद्र में है और भूमध्यसागर को मध्य यूरोप तथा पूर्व को पश्चिम से जोड़ता है। भारत व्यापार और निवेश के नए मौकों के जरिए द्विपक्षीय और क्षेत्रीय जुड़ाव बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वसुधैव कुटुंबकम का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने संघर्षों और आर्थिक विभाजन के बीच सहयोग और विश्वास बढ़ाने तथा शांति और समृद्धि की साझा राह बनाने का आह्वान किया।