प्रकाशित: 15 जनवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
PSLV-C62 की विफलता की जाँच: ISRO ने के. सिवन की अध्यक्षता में विफलता विश्लेषण समिति बनाई; जून 2026 तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को रिपोर्ट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C62 मिशन की विफलता की जाँच के लिए विफलता विश्लेषण समिति (FAC) बनाई है। इसकी अध्यक्षता ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. सिवन कर रहे हैं। भारत सरकार के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजय राघवन की अध्यक्षता में एक अलग बाहरी समिति भी बनाई गई है। अंतिम रिपोर्ट जून 2026 तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंपी जाने की उम्मीद है।
उड़ान के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण, यानी ठोस ईंधन वाले PS3 चरण, में असामान्यता आने के कारण PSLV-C62 मिशन विफल हुआ। PSLV-C61 के बाद यह PSLV के तीसरे चरण की लगातार दूसरी विफलता है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण, निर्माण प्रक्रिया और ISRO के प्रमुख रॉकेट की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुई हैं।
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) भारत का सबसे विश्वसनीय रॉकेट रहा है। PSLV-C62 से पहले इसके 64 प्रक्षेपण हो चुके थे और यह 430 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित कर चुका था, जिनमें 380 से अधिक विदेशी उपग्रह थे। तीसरे चरण की लगातार दो विफलताओं ने इस कार्यक्रम के सामने विश्वसनीयता की अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर दी है।
आंतरिक और बाहरी, दो अलग समितियाँ बनाने का निर्णय संस्थागत जवाबदेही और विफलता की पारदर्शी जाँच के प्रति ISRO की प्रतिबद्धता दिखाता है। डॉ. के. सिवन की अध्यक्षता वाली आंतरिक समिति तकनीकी कारणों की जाँच करेगी। डॉ. के. विजय राघवन की अध्यक्षता वाली बाहरी समिति ISRO की प्रक्रियाओं, कर्मचारियों के प्रबंधन और आपूर्ति शृंखला की गुणवत्ता की स्वतंत्र समीक्षा करके सीधे PMO को रिपोर्ट करेगी।
PSLV-C62 की विफलता का असर भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के साथ पृथ्वी-अवलोकन और नेविगेशन उपग्रहों की प्रक्षेपण योजनाओं पर भी पड़ सकता है। OneWeb के उपग्रह LVM3 यान से प्रक्षेपित किए गए थे, PSLV से नहीं। इससे वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाज़ार में किफायती और विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवा देने वाले देश के रूप में भारत की साख भी प्रभावित होती है। संभावित सुधारों में ठोस मोटर के प्रणोदक की गुणवत्ता की जाँच, ऊपरी चरणों में ताप प्रबंधन और तीसरे चरण को जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना शामिल है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PSLV-C62 की विफलता की जाँच के लिए ISRO ने जो विफलता विश्लेषण समिति (FAC) बनाई है, उसकी अध्यक्षता कौन कर रहे हैं?
PSLV-C62 के लिए **विफलता विश्लेषण समिति (FAC)** की अध्यक्षता ISRO के पूर्व अध्यक्ष **डॉ. के. सिवन** कर रहे हैं। भारत सरकार के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार **डॉ. के. विजय राघवन** की अध्यक्षता में एक अलग **बाहरी समिति** भी बनाई गई है। रिपोर्ट **जून 2026 तक PMO** को सौंपी जानी है।
PSLV-C62 मिशन क्यों विफल हुआ और यह बात विशेष रूप से चिंताजनक क्यों है?
उड़ान के दौरान ठोस ईंधन वाले **तीसरे चरण PS3** में असामान्यता आने के कारण PSLV-C62 विफल हुआ। PSLV-C61 के बाद यह **PSLV के तीसरे चरण की लगातार दूसरी विफलता** है। इसलिए **गुणवत्ता नियंत्रण, निर्माण प्रक्रिया** और ISRO के प्रमुख रॉकेट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
PSLV का अब तक का रिकॉर्ड क्या है और इसे ISRO का प्रमुख प्रक्षेपण यान क्यों माना जाता है?
**ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)** ISRO का सबसे विश्वसनीय रॉकेट रहा है। PSLV-C62 से पहले इसके **64 प्रक्षेपण** हो चुके थे और यह **430 से अधिक उपग्रह** प्रक्षेपित कर चुका था, जिनमें **380 से अधिक विदेशी उपग्रह** थे। इसे ISRO का प्रमुख प्रक्षेपण यान इसलिए माना जाता है क्योंकि यह प्रतिस्पर्धी लागत पर पृथ्वी-अवलोकन, नेविगेशन और वाणिज्यिक उपग्रह जैसे अलग-अलग पेलोड ले जा सकता है। इससे भारत को विश्वसनीय वैश्विक प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में पहचान मिली है।
PSLV-C62 की जाँच के लिए आंतरिक FAC के साथ बाहरी समिति बनाने का क्या महत्व है?
**आंतरिक और बाहरी, दो अलग समितियाँ बनाने का निर्णय** ISRO की **संस्थागत जवाबदेही** और **पारदर्शिता** के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। के. सिवन की अध्यक्षता वाली आंतरिक FAC विफलता के तकनीकी पहलुओं की जाँच करेगी। के. विजय राघवन की अध्यक्षता वाली बाहरी समिति ISRO की प्रक्रियाओं, कर्मचारियों के प्रबंधन और आपूर्ति शृंखला की गुणवत्ता की स्वतंत्र समीक्षा करके सीधे **PMO** को रिपोर्ट करेगी।
PSLV-C62 की विफलता का भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर क्या व्यापक असर पड़ता है?
PSLV-C62 की विफलता का असर (1) वाणिज्यिक प्रक्षेपण के क्षेत्र में **भारत की साख**, (2) पृथ्वी-अवलोकन और नेविगेशन उपग्रहों के **प्रक्षेपण कार्यक्रम**, (3) **वाणिज्यिक प्रक्षेपण की योजना** और (4) ISRO की **गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था**, खासकर ठोस ईंधन वाले ऊपरी चरणों की जाँच, पर पड़ता है। OneWeb के उपग्रह LVM3 यान से प्रक्षेपित किए गए थे, PSLV से नहीं। संभावित सुधारों में प्रणोदक की गुणवत्ता जाँचना, ताप प्रबंधन और तीसरे चरण को जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना शामिल है।