भारत ने अपनी रामसर आर्द्रभूमि सूची में दो नई साइटें जोड़ी हैं, जिससे राष्ट्रीय कुल संख्या 98 हो गई है। यह घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 6 फरवरी 2026 को की। दो नई साइटें हैं — उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ क्षेत्र में छारी-ढांड।

पटना पक्षी अभयारण्य लगभग 1 वर्ग किलोमीटर में फैला है और प्रवासी पक्षियों का एक महत्वपूर्ण आवास है। शीतकाल के चरम पर इस अभयारण्य में 60,000 से अधिक पक्षी आते हैं, जिससे इंडो-गंगेटिक मैदान में इसका पारिस्थितिक महत्व बहुत बढ़ जाता है। यह स्थल मध्य एशियाई प्रवास मार्ग पर जलपक्षियों के लिए एक अनिवार्य पड़ाव है।

छारी-ढांड गुजरात के कच्छ जिले में स्थित एक मौसमी आर्द्रभूमि है, जो लगभग 80 वर्ग किलोमीटर में फैली है। यह विशेष रूप से राजहंस (फ्लेमिंगो) के प्रजनन क्षेत्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। मानसून में जल से भर जाने के बाद यहाँ फ्लेमिंगो के बड़े झुंड प्रजनन के लिए आते हैं।

रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान में अपनाई गई आर्द्रभूमि संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय संधि है। भारत 1982 में इससे जुड़ा और तब से नामांकित स्थलों की संख्या लगातार बढ़ाता रहा है। 2014 से अब तक भारत की रामसर साइटों में 276% की वृद्धि हुई है, जो मिशन LiFE और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण राष्ट्रीय योजना (NPCA) के अंतर्गत सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत की 98 रामसर साइटें एशिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक हैं।