प्रकाशित: 5 फ़रवरी 2026PIB/Ministry of Environmentपर्यावरण
दो नई रामसर आर्द्रभूमियाँ सूची में शामिल: पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) और छारी-ढांड (गुजरात); भारत में कुल संख्या 98 हुई
भारत ने अपनी रामसर आर्द्रभूमि सूची में दो नई साइटें जोड़ी हैं, जिससे राष्ट्रीय कुल संख्या 98 हो गई है। यह घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 6 फरवरी 2026 को की। दो नई साइटें हैं — उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ क्षेत्र में छारी-ढांड।
पटना पक्षी अभयारण्य लगभग 1 वर्ग किलोमीटर में फैला है और प्रवासी पक्षियों का एक महत्वपूर्ण आवास है। शीतकाल के चरम पर इस अभयारण्य में 60,000 से अधिक पक्षी आते हैं, जिससे इंडो-गंगेटिक मैदान में इसका पारिस्थितिक महत्व बहुत बढ़ जाता है। यह स्थल मध्य एशियाई प्रवास मार्ग पर जलपक्षियों के लिए एक अनिवार्य पड़ाव है।
छारी-ढांड गुजरात के कच्छ जिले में स्थित एक मौसमी आर्द्रभूमि है, जो लगभग 80 वर्ग किलोमीटर में फैली है। यह विशेष रूप से राजहंस (फ्लेमिंगो) के प्रजनन क्षेत्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। मानसून में जल से भर जाने के बाद यहाँ फ्लेमिंगो के बड़े झुंड प्रजनन के लिए आते हैं।
रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान में अपनाई गई आर्द्रभूमि संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय संधि है। भारत 1982 में इससे जुड़ा और तब से नामांकित स्थलों की संख्या लगातार बढ़ाता रहा है। 2014 से अब तक भारत की रामसर साइटों में 276% की वृद्धि हुई है, जो मिशन LiFE और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण राष्ट्रीय योजना (NPCA) के अंतर्गत सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत की 98 रामसर साइटें एशिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 में भारत की रामसर सूची में कौन-सी दो नई आर्द्रभूमियाँ जोड़ी गईं?
फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश के एटा में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड को भारत की 97वीं और 98वीं रामसर साइट के रूप में जोड़ा गया।
गुजरात में छारी-ढांड आर्द्रभूमि का पारिस्थितिक महत्व क्या है?
छारी-ढांड, कच्छ में लगभग 80 वर्ग किलोमीटर में फैली एक मौसमी आर्द्रभूमि है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्लेमिंगो प्रजनन क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहाँ मानसून के बाद प्रजनन काल में बड़े और छोटे राजहंस आते हैं।
भारत रामसर कन्वेंशन से कब जुड़ा और 2014 से रामसर साइटों में कितनी वृद्धि हुई है?
भारत 1982 में रामसर कन्वेंशन से जुड़ा। 2014 से अब तक भारत की रामसर के रूप में नामित आर्द्रभूमियों में 276% की वृद्धि हो चुकी है और उनकी संख्या अब 98 तक पहुँच गई है।
रामसर कन्वेंशन क्या है और इसे कहाँ अपनाया गया था?
रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था।
पटना पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट नामित किए जाने का क्या महत्व है?
उत्तर प्रदेश के एटा में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य 1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला आवास-स्थल है, जहाँ शीतकाल में 60,000 से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं। यह मध्य एशियाई प्रवास मार्ग पर स्थित है, इसलिए इसका रामसर नामांकन इंडो-गंगेटिक मैदान में प्रवासी जलपक्षियों के आवास की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।