भारत ने बंगाल की खाड़ी में आईएनएस अरिघात से के-4 पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल ने 3,500 किमी की मारक क्षमता दिखाई और इससे भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। आईएनएस अरिघात 29 अगस्त 2024 को नौसेना में शामिल की गई दूसरी अरिहंत-क्लास पनडुब्बी है; इसी वजह से यह खबर सिर्फ एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की परमाणु त्रय क्षमता के समुद्री हिस्से से जुड़ा अपडेट है।
प्रीलिम्स के लिए मुख्य तथ्य साफ हैं: मिसाइल का नाम के-4, लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म आईएनएस अरिघात, क्षेत्र बंगाल की खाड़ी, और बताई गई मारक क्षमता 3,500 किमी। स्टैटिक जीके में इसे पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल, परमाणु त्रय, समुद्री प्रतिरोधक क्षमता और रक्षा तकनीक से जोड़कर पढ़ना चाहिए। परमाणु त्रय का अर्थ है कि किसी देश के पास जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की व्यवस्था हो; यहां फोकस समुद्री हिस्से पर है।
मुख्य परीक्षा के लिए इस खबर का पहलू रणनीतिक स्थिरता, आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक और सुरक्षित प्रतिरोधक क्षमता है। समुद्र से प्रक्षेपित मिसाइलें इसलिए अहम मानी जाती हैं क्योंकि पनडुब्बी-आधारित प्लेटफ़ॉर्म को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और प्रभावी माना जाता है, जिससे संकट के समय प्रतिरोधक क्षमता अधिक भरोसेमंद बनती है। हालांकि इस खबर को किसी कल्याणकारी योजना, कानून या सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। यह विज्ञान एवं तकनीक और करेंट अफ़ेयर्स के रक्षा एवं अंतरिक्ष तकनीक टॉपिक से जुड़ी खबर है, जिसका उपयोग RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में प्रीलिम्स तथ्य और मुख्य परीक्षा के छोटे विश्लेषण, दोनों में हो सकता है।
