प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत भारत के पहले व्यापक नदी डॉल्फिन सर्वेक्षण में 8 राज्यों की 8,500 किमी नदियों में 6,327 गंगा नदी डॉल्फिन होने का अनुमान लगाया गया। यह सर्वेक्षण 2021 से 2023 तक भारतीय वन्यजीव संस्थान और राज्य वन विभागों ने किया। मार्च 2025 में जारी नतीजों के अनुसार सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में 2,397 रही। इसके बाद बिहार में 2,220, पश्चिम बंगाल में 815 और असम में 635 डॉल्फिन दर्ज की गईं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में मिलाकर 95 डॉल्फिन दर्ज हुईं। पहले लगभग 1,800 डॉल्फिन का अनुमान था, इसलिए यह नई संख्या संरक्षण स्थिति को समझने और आगे की तुलना के लिए अहम आधार देती है। इससे राज्यवार तुलना और नदी-आधारित संरक्षण प्राथमिकताओं के लिए भी साफ आधार मिलता है।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय पर्यावरण, जैव विविधता, नदी-तंत्र और सरकारी संरक्षण कार्यक्रमों को जोड़ता है। गंगा नदी डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और नदी पारिस्थितिकी के स्वास्थ्य का जैव संकेतक मानी जाती है। इसका अर्थ है कि डॉल्फिन की उपस्थिति नदी में जल-प्रवाह, खाद्य श्रृंखला और अपेक्षाकृत बेहतर आवास-स्थिति से जुड़ी परीक्षा-उपयोगी जानकारी देती है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सर्वेक्षण में शामिल अन्य नदी-धाराओं में नदी डॉल्फिन का आकलन प्रीलिम्स में प्रजाति, स्थान और संख्या-आधारित प्रश्नों के लिए उपयोगी है। मुख्य परीक्षा में इसे संरक्षण नीति, समुदाय की भागीदारी, नदी प्रदूषण, अवैध मछली पकड़ने, जाल में फंसने, बालू खनन और बांधों से जुड़ी चुनौतियों के साथ लिखा जा सकता है। RAS और UPSC दोनों में इसे स्टैटिक जीके के जैव विविधता एवं संरक्षण और भारत के भूगोल के प्रमुख नदी-तंत्र विषयों से जोड़कर पढ़ना चाहिए।