प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संघ मंत्रिमंडल ने 2031–2035 की अवधि के लिए भारत का संशोधित राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) स्वीकृत किया। इसे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को प्रस्तुत किया जाएगा। यह नया NDC भारत की पहले की जलवायु प्रतिबद्धताओं पर आधारित है और टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वाकांक्षी रास्ता तय करता है।

नए NDC के प्रमुख लक्ष्य हैं: 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 47% कम करना; 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 60% संचयी बिजली क्षमता प्राप्त करना; और वन एवं वृक्षावरण से 3.5–4 अरब टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना। भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के दीर्घकालिक लक्ष्य को भी फिर दोहराया।

भारत पहले ही अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों से आगे निकल चुका है — फरवरी 2026 तक, 52.57% स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से है, जो 2030 के 50% लक्ष्य से आगे है। ग्रीन इंडिया मिशन और CAMPA के तहत वनीकरण अभियानों से पिछले NDC के 2.5–3 अरब टन कार्बन सिंक लक्ष्य में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

नया NDC साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (CBDR) के भारत के सिद्धांत को दर्शाता है, जिसके अनुसार विकसित देशों को जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। यह स्वीकृति COP 31 से पहले वैश्विक जलवायु नेतृत्व में भारत की भूमिका को और मजबूत करती है।