प्रकाशित: 4 मार्च 2026ORF / MEA / DD News / ANIअंतरराष्ट्रीय
11वां रायसीना डायलॉग 2026 नई दिल्ली में शुरू; 'संस्कार' विषय पर भू-राजनीति, AI और इंडो-पैसिफिक पर चर्चा
11वां रायसीना डायलॉग 5–7 मार्च 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ, जिसे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और विदेश मंत्रालय (MEA) ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। 2026 का विषय 'संस्कार: अभिकथन, समायोजन, अग्रगमन' है — यह संस्कृत अवधारणा से प्रेरित है, जो बताती है कि सभ्यताएं अपनी पहचान कैसे अभिव्यक्त करती हैं, भिन्नताओं को कैसे समायोजित करती हैं और परिष्करण से कैसे आगे बढ़ती हैं।
तीन दिवसीय सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, विदेश मंत्रियों, रक्षा प्रमुखों, व्यापारिक अधिकारियों और प्रमुख शिक्षाविदों ने वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। प्रमुख सत्रों में ताइवान जलडमरूमध्य में निरोध, IMEC कॉरिडोर, भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (DPI) मॉडल, AI शासन व सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और जलवायु भू-राजनीति पर चर्चा हुई।
डायलॉग में 'रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (SDI)' शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य तकनीकी नवाचार को वैश्विक विदेश नीति से जोड़ना है। भारत का यह प्रमुख भू-राजनीतिक सम्मेलन बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में उसकी धुरी शक्ति की भूमिका को मजबूत करता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: इंडिया-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की कनेक्टिविटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन एवं रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल पर ध्यान केंद्रित करते हुए 11वें रायसीना डायलॉग (5-7 मार्च 2026) की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका के प्रक्षेपण में महत्ता का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
11वां रायसीना डायलॉग 5-7 मार्च 2026 को नई दिल्ली में 'संस्कार' विषय के तहत ओआरएफ एवं विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया; 100 से अधिक देशों ने इंडिया-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की कनेक्टिविटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन, अर्धचालक आपूर्ति शृंखला एवं जलवायु भू-राजनीति पर चर्चा की। रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल भी शुरू की गई।
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2026 में नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण कब आयोजित हुआ?
व्याख्या · सही उत्तर Aविदेश मंत्रालय ने बताया था कि रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण नई दिल्ली में 5 से 7 मार्च 2026 तक आयोजित होगा। इसलिए इसकी शुरुआत की तिथि 5 मार्च 2026 थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रायसीना डायलॉग क्या है और इसका आयोजन कौन करता है?
रायसीना डायलॉग भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख वार्षिक बहुपक्षीय सम्मेलन है। यह 2016 से हर साल नई दिल्ली में आयोजित होता है। इसका आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) — एक प्रमुख भारतीय थिंक टैंक — और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
11वें रायसीना डायलॉग 2026 का विषय क्या था और इसका क्या अर्थ है?
11वें रायसीना डायलॉग (5–7 मार्च 2026) का विषय 'संस्कार' था — यह संस्कृत शब्द परिष्करण, परिवर्तन और उन संस्कारों को दर्शाता है जो चरित्र और सभ्यता को आकार देते हैं। यह विषय वैश्विक शासन, कूटनीति और बहुध्रुवीय विश्व में बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भारत के सभ्यतागत दृष्टिकोण को सामने रखता है।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) क्या है और यह रायसीना 2026 में मुख्य एजेंडा क्यों था?
IMEC एक प्रस्तावित बहु-माध्यम कनेक्टिविटी कॉरिडोर है जिसकी घोषणा सितंबर 2023 के G20 नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में हुई थी। इसका उद्देश्य UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के रास्ते भारत को यूरोप से जोड़ना है — समुद्री मार्ग, रेल और सड़क संपर्क को मिलाकर। IMEC रणनीतिक रूप से चीन की BRI के विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति के कारण यह रायसीना 2026 में प्रमुख एजेंडा था।
2026 में लॉन्च की गई रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (SDI) क्या है?
रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (SDI) 11वें रायसीना डायलॉग में शुरू किया गया नया प्लेटफ़ॉर्म है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साधन के रूप में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के उपयोग को संस्थागत रूप देता है। इसका उद्देश्य AI, अंतरिक्ष और बायोटेक जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकियों में बहुपक्षीय सहयोग को आसान बनाना है — ये क्षेत्र अवसर भी देते हैं और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र भी हैं।
रायसीना डायलॉग 2026 जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर AI शासन केंद्रीय विषय क्यों है?
AI शासन एक केंद्रीय वैश्विक नीति मुद्दा बन गया है क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता परिवर्तनकारी अवसरों और जोखिमों दोनों को जन्म देती है — जिनमें स्वायत्त हथियार, एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह, दुष्प्रचार और आर्थिक व्यवधान शामिल हैं। रायसीना 2026 में भारत के रुख ने समावेशी AI शासन पर जोर दिया, जो केवल पश्चिमी तकनीकी शक्तियों के बजाय वैश्विक दक्षिण के हितों का प्रतिनिधित्व करे।