प्रकाशित: 13 नवंबर 2025PIBपर्यावरण
भारत में कार्बन उत्सर्जन की वृद्धि 2025 में केवल 1.4% — 2020 के बाद सबसे कम दर
Climate TRACE और Down to Earth के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन केवल 1.4% बढ़ा, जो 2020 के बाद सबसे धीमी वृद्धि दर है। उत्सर्जन वृद्धि की यह धीमी रफ्तार मुख्य रूप से बिजली क्षेत्र से प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी और अच्छे मानसून सीजन के कारण नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के तेज विस्तार से जुड़ी मानी जा रही है।
बिजली क्षेत्र भारत के कुल CO2 उत्सर्जन का लगभग 50% हिस्सा है। 2025 में इस क्षेत्र में कोयला-आधारित उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आई, क्योंकि सामान्य से अधिक मानसून वर्षा ने जलविद्युत उत्पादन बढ़ाया और थर्मल प्लांट लोड कारकों को घटाया। साथ ही, भारत ने सौर और पवन ऊर्जा सहित रिकॉर्ड नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।
1.4% उत्सर्जन वृद्धि 2021-23 के पोस्ट-कोविड उछाल वाले वर्षों से अलग है, जब भारत का उत्सर्जन सालाना 6-8% बढ़ा था। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भारत के 2030 NDC लक्ष्य — GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45% कम करना और 50% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता हासिल करना — काफी अधिक आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि केवल एक वर्ष की मंदी से यह नहीं माना जा सकता कि उत्सर्जन संरचनात्मक रूप से अपने चरम पर पहुंच गया है। कोयला अब भी प्रमुख ऊर्जा स्रोत बना हुआ है और भारत कोयला खनन क्षमता का विस्तार जारी रखता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में भारत की कार्बन उत्सर्जन वृद्धि दर क्या थी और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
2025 में भारत का CO2 उत्सर्जन केवल 1.4% बढ़ा — 2020 के बाद सबसे कम — यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और अच्छे मानसून के कारण बढ़े जलविद्युत उत्पादन ने कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में प्रगति का संकेत दिया।
उत्सर्जन वृद्धि में आई मंदी में किस क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान था?
बिजली क्षेत्र, जो भारत के CO2 उत्सर्जन का ~50% है, में कोयला-आधारित उत्पादन घटा, क्योंकि अच्छे मानसून से जलविद्युत उत्पादन बढ़ा और नवीकरणीय क्षमता का विस्तार हुआ।
उत्सर्जन से संबंधित भारत के 2030 NDC लक्ष्य क्या हैं?
भारत के 2030 NDC लक्ष्यों में 2005 के स्तर से GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45% कम करना और 50% गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करना शामिल है।
विशेषज्ञ 2025 की मंदी को अधिक महत्व न देने की सलाह क्यों देते हैं?
एक वर्ष की गिरावट से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उत्सर्जन संरचनात्मक रूप से अपने चरम पर पहुंच गया है; कोयला अब भी प्रमुख बना हुआ है और भारत मांग पूरी करने के लिए कोयला खनन का विस्तार जारी रखता है।
RAS और UPSC परीक्षाओं के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (NDC, पेरिस समझौता), नवीकरणीय ऊर्जा नीति (PM सूर्य घर, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) और पर्यावरण-अर्थव्यवस्था संबंध को शामिल करता है।