Climate TRACE और Down to Earth के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन केवल 1.4% बढ़ा, जो 2020 के बाद सबसे धीमी वृद्धि दर है। उत्सर्जन वृद्धि की यह धीमी रफ्तार मुख्य रूप से बिजली क्षेत्र से प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी और अच्छे मानसून सीजन के कारण नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के तेज विस्तार से जुड़ी मानी जा रही है।

बिजली क्षेत्र भारत के कुल CO2 उत्सर्जन का लगभग 50% हिस्सा है। 2025 में इस क्षेत्र में कोयला-आधारित उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आई, क्योंकि सामान्य से अधिक मानसून वर्षा ने जलविद्युत उत्पादन बढ़ाया और थर्मल प्लांट लोड कारकों को घटाया। साथ ही, भारत ने सौर और पवन ऊर्जा सहित रिकॉर्ड नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

1.4% उत्सर्जन वृद्धि 2021-23 के पोस्ट-कोविड उछाल वाले वर्षों से अलग है, जब भारत का उत्सर्जन सालाना 6-8% बढ़ा था। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भारत के 2030 NDC लक्ष्य — GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45% कम करना और 50% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता हासिल करना — काफी अधिक आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि केवल एक वर्ष की मंदी से यह नहीं माना जा सकता कि उत्सर्जन संरचनात्मक रूप से अपने चरम पर पहुंच गया है। कोयला अब भी प्रमुख ऊर्जा स्रोत बना हुआ है और भारत कोयला खनन क्षमता का विस्तार जारी रखता है।