5 मार्च 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भारत की आगामी जनगणना 2027 के शुभंकरों और डिजिटल साधनों का प्रारंभिक शुभारंभ किया। दो शुभंकर — 'प्रगति' (महिला प्रगणक) और 'विकास' (पुरुष प्रगणक) — जनगणना प्रक्रिया का सार्वजनिक चेहरा होंगे और विकसित भारत 2047 की दिशा में राष्ट्र-निर्माण में पुरुषों और महिलाओं की समान भागीदारी का प्रतीक होंगे।

जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी और नागरिकों को सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल से स्व-प्रगणना की सुविधा देने वाली पहली जनगणना होगी। इसमें जाति पर भी प्रश्न शामिल होंगे; 1931 के बाद यह पहली जनगणना होगी जिसमें जाति संबंधी डेटा की गणना की जाएगी। गणना कार्यों को आसान बनाने के लिए C-DAC द्वारा विकसित चार डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शुरू किए गए।

जनगणना दो चरणों में होगी: (1) मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (HLO) — 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक, प्रत्येक राज्य और UT 30 दिनों की निरंतर अवधि अधिसूचित करेगा; और (2) जनसंख्या गणना — फरवरी 2027 में। जनगणना 2027 का डेटा महिला आरक्षण अधिनियम (33% आरक्षण) के कार्यान्वयन के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।