प्रकाशित: 27 मार्च 2026समाचार स्रोतशासन
संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 पारित किया — प्रमुख प्रावधान और विवाद
संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। लोकसभा में ध्वनि मत से पारित होने के बाद, विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा ने इसे मंजूरी दी। विधेयक 13 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और यह ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करता है।
प्रमुख प्रावधान: (1) विधेयक 2019 अधिनियम की व्यापक 'ट्रांसजेंडर' परिभाषा हटाकर सीमित श्रेणियों की सूची लाता है — कानूनी मान्यता केवल हिजड़ा, किन्नर जैसे ऐतिहासिक सामाजिक-सांस्कृतिक समूहों और इंटरसेक्स व्यक्तियों तक सीमित। स्व-पहचान करने वाले ट्रांस पुरुष, ट्रांस महिलाएं और गैर-बाइनरी लिंग वाले व्यक्ति नई परिभाषा से बाहर। (2) पहचान पत्र के लिए अब जिला दंडाधिकारी से पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी या उप-सीएमओ की अध्यक्षता वाले चिकित्सा बोर्ड की जांच अनिवार्य। (3) नए अपराध: किसी पर ट्रांसजेंडर पहचान ज़बरदस्ती लागू कराने के उद्देश्य से अपहरण या गंभीर चोट पहुंचाने पर वयस्क पीड़ित के मामले में 10 साल से आजीवन कारावास और ₹2 लाख जुर्माना; बाल पीड़ित के मामले में आजीवन कारावास और ₹5 लाख जुर्माना।
आलोचना: मानवाधिकार संगठनों और विधि विशेषज्ञों ने चिकित्सा बोर्ड की आवश्यकता को NALSA निर्णय (2014) के विरुद्ध और अनुच्छेद 14, 19 व 21 का उल्लंघन बताया है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: लिंग के स्व-निर्धारण पर नालसा निर्णय के विरुद्ध ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 की आलोचनात्मक परख कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
राज्यसभा की मंजूरी के बाद संसद ने ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026 पारित किया। यह कानूनी परिभाषा को हिजड़ा, किन्नर एवं इंटरसेक्स श्रेणियों तक सीमित करता है और जिलाधिकारी द्वारा दस्तावेज जारी करने से पहले चिकित्सा बोर्ड प्रमाणन अनिवार्य बनाता है। नागरिक समाज ने इसे 2014 नालसा स्व-पहचान अधिकार के लिए बड़ा झटका बताया।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयराष्ट्रीयपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतसमाचार स्रोत
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 किस मूल अधिनियम में संशोधन करता है?
व्याख्या · सही उत्तर Dयह विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करता है, जिसमें स्व-पहचान की जगह एक बंद सूची वाली व्यवस्था और चिकित्सा बोर्ड के प्रमाणन को लागू किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 किस मूल अधिनियम में संशोधन करता है और 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति' की नई परिभाषा क्या है?
संशोधन विधेयक 2026 ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करता है। नई परिभाषा में 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति' को हिजड़ा, किन्नर और इंटरसेक्स श्रेणियों तक सीमित किया गया है।
संशोधन विधेयक 2026 में ट्रांसजेंडर के रूप में आधिकारिक मान्यता के लिए कौन सी नई अनिवार्य आवश्यकता जोड़ी गई?
संशोधन विधेयक 2026 में ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में आधिकारिक मान्यता के लिए चिकित्सा बोर्ड का प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। यह पहले की स्व-पहचान व्यवस्था की जगह लेता है।
संशोधन विधेयक 2026 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित कौन सा नया आपराधिक प्रावधान जोड़ा गया?
संशोधन विधेयक 2026 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अपहरण के लिए विशेष नए आपराधिक प्रावधान जोड़े गए।
ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक 2026 की बहस में संविधान के कौन से अनुच्छेद प्रासंगिक हैं?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) इस विधेयक की बहस के केंद्र में हैं।
ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक 2026 के पारित होने पर विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया रही?
विपक्ष ने विधेयक पारित होने के दौरान वॉकआउट किया और नागरिक समाज संगठनों ने 2019 अधिनियम में दिए गए स्व-पहचान अधिकारों को हटाने की आलोचना की।