संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। लोकसभा में ध्वनि मत से पारित होने के बाद, विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा ने इसे मंजूरी दी। विधेयक 13 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और यह ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करता है।

प्रमुख प्रावधान: (1) विधेयक 2019 अधिनियम की व्यापक 'ट्रांसजेंडर' परिभाषा हटाकर सीमित श्रेणियों की सूची लाता है — कानूनी मान्यता केवल हिजड़ा, किन्नर जैसे ऐतिहासिक सामाजिक-सांस्कृतिक समूहों और इंटरसेक्स व्यक्तियों तक सीमित। स्व-पहचान करने वाले ट्रांस पुरुष, ट्रांस महिलाएं और गैर-बाइनरी लिंग वाले व्यक्ति नई परिभाषा से बाहर। (2) पहचान पत्र के लिए अब जिला दंडाधिकारी से पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी या उप-सीएमओ की अध्यक्षता वाले चिकित्सा बोर्ड की जांच अनिवार्य। (3) नए अपराध: किसी पर ट्रांसजेंडर पहचान ज़बरदस्ती लागू कराने के उद्देश्य से अपहरण या गंभीर चोट पहुंचाने पर वयस्क पीड़ित के मामले में 10 साल से आजीवन कारावास और ₹2 लाख जुर्माना; बाल पीड़ित के मामले में आजीवन कारावास और ₹5 लाख जुर्माना।

आलोचना: मानवाधिकार संगठनों और विधि विशेषज्ञों ने चिकित्सा बोर्ड की आवश्यकता को NALSA निर्णय (2014) के विरुद्ध और अनुच्छेद 14, 19 व 21 का उल्लंघन बताया है।