केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नदी जल गुणवत्ता पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि भारत में प्रदूषित नदी खंडों की संख्या 2022 में 815 से घटकर 2023 में 807 हो गई। 8 खंडों की यह कमी भारत की नदियों के स्वास्थ्य में क्रमिक सुधार का संकेत देती है, जिसका मुख्य कारण चल रहा नमामि गंगे कार्यक्रम और राज्यों की विभिन्न नदी पुनरुद्धार पहलें हैं।

सीपीसीबी बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), घुलित ऑक्सीजन (डीओ) और कुल कोलीफॉर्म जैसे मापदंडों के आधार पर नदी जल गुणवत्ता की निगरानी करता है। किसी खंड को तब प्रदूषित माना जाता है जब बीओडी 3 मिग्रा/लीटर से अधिक हो। 2023 की रिपोर्ट में 28 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 603 नदी खंडों का मूल्यांकन किया गया।

सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में प्राथमिकता-1 खंडों की संख्या भी शामिल है — ये वे खंड हैं जहाँ गंभीर प्रदूषण है और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। इनकी संख्या 311 से कम हो गई है, जो केंद्रित उपचारात्मक प्रयासों का संकेत है। गंगा बेसिन में नमामि गंगे के तहत निवेश के बाद प्रमुख खंड जल गुणवत्ता मानदंड पूरे कर रहे हैं, जिसकी कुल लागत 37,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

यह रिपोर्ट RPSC RAS परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत में पर्यावरणीय शासन, जल नीति और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है। यमुना, गोमती और साबरमती जैसी नदियाँ अभी भी सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल हैं।