प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान के बाँसवाड़ा में माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी। इस परियोजना में 700 मेगावाट के चार स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर होंगे, जिनकी कुल क्षमता 2,800 मेगावाट है और कुल लागत लगभग 42,000 करोड़ रुपये है। NTPC के अनुसार पहली 700 मेगावाट इकाई के प्रारंभिक परीक्षण का अनुमान वित्त वर्ष 2032-33 के लिए है। एनपीसीआईएल वर्तमान में 8,780 मेगावाट स्थापित क्षमता वाले 24 परमाणु रिएक्टर संचालित करता है और 2031-32 तक कुल स्थापित क्षमता 21,980 मेगावाट होने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री मोदी ने माही-बाँसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान के बाँसवाड़ा में माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी। इस परियोजना में 700 मेगावाट के चार स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर होंगे, जिनकी कुल क्षमता 2,800 मेगावाट है और कुल लागत लगभग 42,000 करोड़ रुपये है। NTPC के अनुसार पहली 700 मेगावाट इकाई के प्रारंभिक परीक्षण का अनुमान वित्त वर्ष 2032-33 के लिए है। एनपीसीआईएल वर्तमान में 8,780 मेगावाट स्थापित क्षमता वाले 24 परमाणु रिएक्टर संचालित करता है और 2031-32 तक कुल स्थापित क्षमता 21,980 मेगावाट होने का अनुमान है।
मुख्य तथ्य
- PM मोदी 25 सितंबर 2025 को माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की नींव रखेंगे।
- परियोजना में 2,800 MW उत्पादन क्षमता वाले चार स्वदेशी 700 MWe PHWR हैं।
- अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ है और 2036 तक पूर्ण होने का लक्ष्य है।
- भारत में इस समय 23 रिएक्टरों से 7,480 MWe की स्थापित परमाणु क्षमता है।
- यह 2031-32 तक 22,480 MWe की परमाणु क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का हिस्सा है।
- यह संयंत्र राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और कार्बन उत्सर्जन कम करेगा।
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राजस्थान में प्रस्तावित माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की कुल स्थापित क्षमता कितनी है?
माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर होंगे। इनसे कुल 2,800 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माही-बाँसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र क्या है और इसकी नींव कब रखी गई?
माही-बाँसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र राजस्थान में एक ग्रीनफील्ड परमाणु परियोजना है जिसमें चार स्वदेशी 700 MWe दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) होंगे, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 2,800 MW है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को इसकी नींव रखी। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ है और 2036 तक पूर्ण होने का लक्ष्य है।
दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) में भारी जल (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) मॉडरेटर और शीतलक, दोनों के रूप में इस्तेमाल होता है और यह प्राकृतिक यूरेनियम से चल सकता है — संवर्धन की जरूरत नहीं होती। यह तकनीक भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भारत के घरेलू यूरेनियम संसाधनों का उपयोग होता है और यह DAE व NPCIL द्वारा विकसित दशकों की स्वदेशी परमाणु इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को दर्शाती है।
भारत की वर्तमान परमाणु विद्युत स्थापित क्षमता क्या है और 2031-32 का लक्ष्य क्या है?
2024 तक भारत की स्थापित परमाणु क्षमता 23 चालू रिएक्टरों के साथ 7,480 MWe (लगभग 8.18 GW) है। भारत 2031-32 तक इसे बढ़ाकर 22,480 MWe करना चाहता है — यानी लगभग तीन गुना। माही-बाँसवाड़ा संयंत्र का 2,800 MW योगदान इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
राजस्थान के बाँसवाड़ा को परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए क्यों चुना गया?
माही-बाँसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए बाँसवाड़ा को इसलिए चुना गया क्योंकि माही नदी पास है, जिससे रिएक्टरों के शीतलन के लिए पानी मिल सकता है; भूमि उपलब्ध है; भूकंपीय गतिविधि कम है; और यह बिजली की कमी वाले क्षेत्र में स्थित है। यह संयंत्र राज्य और क्षेत्रीय ग्रिड में महत्वपूर्ण आधार-भार क्षमता जोड़ेगा, जिससे राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा सीधे मजबूत होगी।
माही-बाँसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत के व्यापक ऊर्जा संक्रमण में कैसे जुड़ता है?
परमाणु ऊर्जा शून्य-कार्बन आधार-भार बिजली देती है — यानी ऐसी बिजली जो मौसम की परवाह किए बिना लगातार मिलती है — इसलिए यह सौर और पवन जैसे मौसम-निर्भर नवीकरणीय स्रोतों की पूरक है। 2,800 MW परमाणु क्षमता जोड़कर माही-बाँसवाड़ा कोयले पर निर्भरता घटाने, बिना कार्बन उत्सर्जन बढ़ाए बढ़ती बिजली माँग पूरी करने और 2031-32 तक 22.48 GW परमाणु क्षमता के NDC लक्ष्य को पाने में मदद करता है।
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