तमिलनाडु की श्रेसन फार्मा द्वारा बनाए गए कोल्ड्रिफ कफ सिरप को कई राज्यों ने प्रतिबंधित कर दिया। आधिकारिक जाँच में मध्यप्रदेश में बच्चों के गुर्दे अचानक फेल होने और मौतों से जुड़े बैच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट की पुष्टि हुई थी। म.प्र. के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में एक माह में 6 वर्ष से कम उम्र के 20 बच्चों की मृत्यु बुखार-खाँसी के लिए यह सिरप दिए जाने के बाद हुई। DEG विषाक्तता से धीरे-धीरे गुर्दे फेल हो सकते हैं। CDSCO ने राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया। इस घटना ने 2023 के मैरियन बायोटेक मामले की याद दिलाई और बच्चों की दवाओं में अनिवार्य GC-MS परीक्षण व सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की माँग फिर उठी।
दूषित कफ-सिरप 'कोल्ड्रिफ' मध्यप्रदेश में 20 बच्चों की मौत से जुड़ा — कई राज्यों ने प्रतिबंध लगाया
तमिलनाडु की श्रेसन फार्मा द्वारा बनाए गए कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर कई राज्यों ने प्रतिबंध लगा दिया, जब आधिकारिक जाँच में मध्यप्रदेश में बच्चों में तीव्र गुर्दा फेल होने और मौतों से जुड़े बैच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट की पुष्टि हुई। म.प्र. के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में एक माह में 6 वर्ष से कम उम्र के 20 बच्चों की मृत्यु बुखार-खाँसी के लिए यह सिरप दिए जाने के बाद हुई। DEG विषाक्तता से धीरे-धीरे गुर्दे फेल होते हैं। CDSCO ने देशभर में अलर्ट जारी किया। इस घटना ने 2023 के मैरियन बायोटेक मामले की याद दिलाई और बच्चों की दवाओं में अनिवार्य GC-MS परीक्षण व सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की माँग फिर उठाई।
मुख्य तथ्य
- तमिलनाडु की श्रेसन फार्मा के दूषित कफ-सिरप कोल्ड्रिफ से मध्यप्रदेश में 20 बच्चों की मौत हुई।
- मौतें छिंदवाड़ा और बैतूल के आदिवासी जिलों में 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हुईं।
- आधिकारिक जाँच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट से गुर्दे की तीव्र विफलता की पुष्टि हुई।
- CDSCO ने राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया और कई राज्यों ने सिरप पर प्रतिबंध लगाया।
- इस घटना ने 2023 के मैरियन बायोटेक मामले की याद दिलाई और अनिवार्य GC-MS परीक्षण की माँग उठी।
- बच्चों की दवाओं के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण लागू करने की माँग की गई है।
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2025 की कोल्ड्रिफ त्रासदी, 2023 की किस भारतीय कफ सिरप त्रासदी की याद दिलाती है, जो बच्चों की मौतों से जुड़ी थी?
कोल्ड्रिफ घटना ने 2023 में उज्बेकिस्तान में बच्चों की मैरियन बायोटेक से जुड़ी मौतों की याद दिलाई। इसके बाद एक्सीपिएंट्स के अनिवार्य जीसी-एमएस परीक्षण और बाल-चिकित्सा फॉर्मूलेशन पर सख्त गुणवत्ता नियंत्रण लागू करने की मांग फिर तेज हुई।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोल्ड्रिफ कफ-सिरप में कौन-सा दूषक पाया गया और यह किस तरह नुकसान पहुँचाता है?
आधिकारिक जाँच में तमिलनाडु की श्रेसन फार्मा द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ के एक बैच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट की पुष्टि हुई। DEG एक औद्योगिक विलायक है, जिसे पीने पर विषैला असर होता है। यह शरीर में ग्लाइकोलिक और ऑक्जेलिक एसिड में बदलकर गुर्दे की नलिकाओं को नुकसान पहुँचाता है, जिससे तीव्र गुर्दा-क्षति (AKI) और अंततः गुर्दा-विफलता होती है। छह वर्ष से कम उम्र के बच्चे कम शरीर-भार और विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने की अपरिपक्व शारीरिक क्षमता के कारण विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं।
मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ-सिरप से हुई मौतों से कौन-से जिले प्रभावित हुए और पीड़ित कौन थे?
मौतें मध्यप्रदेश के आदिवासी जिलों छिंदवाड़ा और बैतूल में हुईं। सभी 20 पीड़ित छह वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे, जिन्हें मिलावट पकड़े जाने से लगभग एक महीने पहले बुखार, खाँसी और जुकाम के लिए यह सिरप दिया गया था।
CDSCO क्या है और उसने कोल्ड्रिफ मामले में क्या कार्रवाई की?
CDSCO यानी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन भारत का राष्ट्रीय दवा नियामक निकाय है, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। कोल्ड्रिफ मामले में प्रयोगशाला परीक्षणों से DEG मिलावट की पुष्टि होने के बाद CDSCO ने सभी राज्य औषधि नियंत्रकों को राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया, जिसके बाद कई राज्यों ने और मौतें रोकने के लिए इस सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया।
कोल्ड्रिफ मामला 2023 के मैरियन बायोटेक मामले से कैसे संबंधित है और कौन-से सुधारों की माँग उठी?
2023 के मैरियन बायोटेक मामले में भारत में बने DEG से दूषित कफ-सिरप उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौतों से जुड़े थे। कोल्ड्रिफ मामला उसी त्रासदी की पुनरावृत्ति है। इसने सभी फार्मास्युटिकल विलायकों के उपयोग से पहले अनिवार्य GC-MS परीक्षण, बाल-चिकित्सा फॉर्मूलेशन के लिए सख्त बैच रिलीज प्रोटोकॉल और दवा निर्माण इकाइयों के बेहतर निरीक्षण की माँग को फिर से उठाया है।
भारत में फार्मास्युटिकल निर्माताओं को उत्पाद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस दवा नियामक ढाँचे के तहत काम करना पड़ता है?
भारत में दवा निर्माता औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के तहत काम करते हैं। ये नियम बाज़ार में जारी करने से पहले सभी बैचों के लिए अच्छी विनिर्माण पद्धतियों (GMP) और गुणवत्ता परीक्षण को अनिवार्य बनाते हैं। नियमों की अनुसूची M GMP मानक निर्धारित करती है। उल्लंघन पर विनिर्माण लाइसेंस रद्द करने और कंपनी अधिकारियों के आपराधिक अभियोजन का प्रावधान है।
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