प्रकाशित: 26 सितंबर 2025समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
नीति आयोग राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025: ओडिशा और छत्तीसगढ़ शीर्ष पर; राजस्थान की स्थिति
नीति आयोग ने 24 जनवरी 2025 को राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025 जारी किया, जिसमें सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता के आधार पर भारतीय राज्यों को क्रम दिया गया। सूचकांक पांच प्रमुख मापदंडों पर राज्यों का मूल्यांकन करता है: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व एकत्रीकरण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ इस सूचकांक में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे। इससे मजबूत राजकोषीय प्रबंधन, कम घाटे और कुल व्यय की तुलना में पूंजीगत व्यय की बेहतर गुणवत्ता दिखाई देती है।
राजस्थान की राजकोषीय स्थिति नीतिगत चिंता का विषय रही है। राज्य को जीएसडीपी के सापेक्ष उच्च राजकोषीय घाटे, बढ़ते ऋण बोझ और बड़े प्रतिबद्ध व्यय दायित्वों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। बिजली क्षेत्र के बकाया, पेंशन देनदारियां और केंद्रीय योजनाओं से जुड़ी ऋण चुकौती ने राजकोषीय तनाव बढ़ाया है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक प्रतिस्पर्धी संघवाद के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है — यह राज्यों के बीच वित्तीय शासन सुधारने, अपव्ययी व्यय घटाने और पूंजी निवेश बढ़ाने का दबाव बनाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीति आयोग राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025 में कौन से राज्य शीर्ष पर रहे?
ओडिशा और छत्तीसगढ़ राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025 में शीर्ष पर रहे।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक किन मापदंडों पर राज्यों का मूल्यांकन करता है?
पांच मापदंड: राजकोषीय विवेक, ऋण प्रबंधन, व्यय की गुणवत्ता, राजस्व संग्रहण और राजकोषीय पारदर्शिता।
सूचकांक में राजस्थान की मुख्य राजकोषीय चुनौती क्या है?
जीएसडीपी के सापेक्ष उच्च राजकोषीय घाटा, बढ़ता कुल ऋण, बिजली क्षेत्र के बकाया और पेंशन देनदारियां।
इस संदर्भ में प्रतिस्पर्धी संघवाद क्या है?
प्रतिस्पर्धी संघवाद से तात्पर्य है कि राज्य शासन सूचकांकों पर आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे वित्तीय प्रबंधन सुधारने और निवेश आकर्षित करने का दबाव बनता है।
राज्य सरकार के लिए राजकोषीय स्वास्थ्य महत्वपूर्ण क्यों है?
अच्छा राजकोषीय स्वास्थ्य राज्य को प्रतिस्पर्धी दर पर उधार लेने, पूंजी निवेश बनाए रखने, कल्याण योजनाओं को वित्त पोषित करने और निजी निवेश आकर्षित करने में सक्षम बनाता है।