नीति आयोग ने 24 जनवरी 2025 को राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025 जारी किया, जिसमें सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता के आधार पर भारतीय राज्यों को क्रम दिया गया। सूचकांक पांच प्रमुख मापदंडों पर राज्यों का मूल्यांकन करता है: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व एकत्रीकरण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ इस सूचकांक में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे। इससे मजबूत राजकोषीय प्रबंधन, कम घाटे और कुल व्यय की तुलना में पूंजीगत व्यय की बेहतर गुणवत्ता दिखाई देती है।

राजस्थान की राजकोषीय स्थिति नीतिगत चिंता का विषय रही है। राज्य को जीएसडीपी के सापेक्ष उच्च राजकोषीय घाटे, बढ़ते ऋण बोझ और बड़े प्रतिबद्ध व्यय दायित्वों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। बिजली क्षेत्र के बकाया, पेंशन देनदारियां और केंद्रीय योजनाओं से जुड़ी ऋण चुकौती ने राजकोषीय तनाव बढ़ाया है।

राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक प्रतिस्पर्धी संघवाद के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है — यह राज्यों के बीच वित्तीय शासन सुधारने, अपव्ययी व्यय घटाने और पूंजी निवेश बढ़ाने का दबाव बनाता है।