कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU का उद्देश्य पूरी डेयरी मूल्य श्रृंखला में बहु-विषयक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण से जुड़े सहयोग को बढ़ाना है। इसके तहत ICAR की वैज्ञानिक अनुसंधान विशेषज्ञता को NDDB के व्यापक क्षेत्रीय नेटवर्क और कार्यान्वयन अनुभव से जोड़ा जाएगा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में अधिक उत्पादक और रोग-प्रतिरोधी मवेशी तथा भैंस नस्लों का विकास, पशु पोषण और स्वास्थ्य में सुधार, जलवायु के अनुकूल पशुधन प्रबंधन, डेयरी प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियाँ और डेयरी किसानों व सहकारी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शामिल हैं। यह साझेदारी भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत 23 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। भारत का डेयरी सहकारी मॉडल — अमूल और डॉ. वर्गीज कुरियन द्वारा आगे बढ़ाया गया आनंद पैटर्न — सहकारी नेटवर्क में 1.8 करोड़ किसान सदस्यों को जोड़ता है। ICAR 113 संस्थानों और राष्ट्रीय ब्यूरो का प्रबंधन करती है, जबकि NDDB राज्यों में सहकारी डेयरी विकास की देखरेख करती है। राजस्थान, अपनी बड़ी पशु और ऊँट आबादी तथा मजबूत डेयरी सहकारी नेटवर्क के साथ, इस सहयोग से अपेक्षित शोध परिणामों का एक प्रमुख लाभार्थी होगा।
ICAR और NDDB ने डेयरी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए: वैज्ञानिक विशेषज्ञता को जमीनी स्तर के कार्यान्वयन से जोड़ना
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU का उद्देश्य पूरी डेयरी मूल्य श्रृंखला में बहु-विषयक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है — यानी ICAR की वैज्ञानिक अनुसंधान विशेषज्ञता को NDDB के ज़मीनी स्तर के व्यापक नेटवर्क और कार्यान्वयन अनुभव से जोड़ना। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में अधिक उत्पादक और रोग-प्रतिरोधी मवेशी और भैंस नस्लों का विकास, पशु पोषण और स्वास्थ्य में सुधार, जलवायु के अनुकूल पशुधन प्रबंधन, डेयरी प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियाँ तथा डेयरी किसानों और सहकारी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शामिल हैं। यह साझेदारी भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत 23 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। भारत का डेयरी सहकारी मॉडल — अमूल और डॉ. वर्गीज कुरियन द्वारा आगे बढ़ाया गया आनंद पैटर्न — सहकारी नेटवर्क में 1.8 करोड़ किसान सदस्यों को जोड़ता है। ICAR 113 संस्थानों और राष्ट्रीय ब्यूरो का प्रबंधन करती है, जबकि NDDB राज्यों में सहकारी डेयरी विकास की देखरेख करती है। राजस्थान, अपनी बड़ी पशु और ऊँट आबादी तथा मजबूत डेयरी सहकारी नेटवर्क के कारण, इस सहयोग से अपेक्षित शोध परिणामों का एक प्रमुख लाभार्थी होगा।
मुख्य तथ्य
- ICAR और NDDB ने 16 जनवरी 2026 को डेयरी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
- प्रमुख क्षेत्रों में अधिक उत्पादक मवेशी नस्लें, पशु पोषण और जलवायु के अनुकूल पशुधन प्रबंधन शामिल हैं।
- भारत 23 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है।
- भारत का डेयरी सहकारी मॉडल (अमूल-आनंद पैटर्न) 17 करोड़ से अधिक दूध उत्पादकों से जुड़ा है।
- MoU लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुँहपका रोग जैसी चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।
- राजस्थान अपनी बड़ी पशु आबादी और डेयरी सहकारी नेटवर्क के कारण एक प्रमुख लाभार्थी होगा।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2023 (a) 'भारत के पक्षी पुरुष' के नाम से जाने जाने वाले वैज्ञानिक का नाम बताइए और उनके योगदानों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। (b) 'भारत के दुग्ध पुरुष' किसे कहा जाता है? उनके योगदानों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। — 2023 आरएएस मुख्य परीक्षा का भारत के दुग्ध-पुरुष पर प्रश्न सीधे डॉ. वर्गीज कुरियन एवं आनंद पैटर्न सहकारी डेयरी मॉडल का संदर्भ देता है, जिन्हें इस समझौता ज्ञापन लेख में स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने जनवरी 2026 में डेयरी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। भारत की डेयरी मूल्य श्रृंखला और राजस्थान के लिए इस साझेदारी के महत्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
16 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित आईसीएआर-एनडीडीबी समझौता ज्ञापन में आईसीएआर के 113 संस्थानों का वैज्ञानिक अनुसंधान और एनडीडीबी का 17 करोड़ दूध-उत्पादक सहकारी नेटवर्क साथ आते हैं। प्रमुख क्षेत्र हैं: उच्च-उत्पादक नस्लें, लम्पी स्किन रोग नियंत्रण और डेयरी प्रसंस्करण। 23 करोड़ टन वार्षिक दूध उत्पादन वाला विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक भारत और राजस्थान इससे लाभान्वित होंगे।
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आईसीएआर-एनडीडीबी समझौता ज्ञापन लेख में संदर्भित भारत का वार्षिक दुग्ध उत्पादन लगभग कितने से अधिक है?
लेख में उल्लेख है कि भारत 23 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक के वार्षिक उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनवरी 2026 में ICAR और NDDB ने किस MoU पर हस्ताक्षर किए और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) और NDDB (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) ने 16 जनवरी 2026 को MoU पर हस्ताक्षर किए। इसका मुख्य उद्देश्य पूरी डेयरी मूल्य शृंखला में बहु-विषयक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाना है, ताकि ICAR की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को NDDB के व्यापक जमीनी नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए ICAR-NDDB MoU के प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र क्या हैं?
MoU उच्च उत्पादक और रोग-प्रतिरोधी मवेशी तथा भैंस नस्लों के विकास, पशु पोषण में सुधार, जलवायु के अनुकूल पशुधन प्रबंधन को बढ़ावा देने और लम्पी स्किन डिजीज तथा खुरपका-मुँहपका रोग जैसी डेयरी उत्पादकता को प्रभावित करने वाली बीमारियों से निपटने पर केंद्रित है।
वैश्विक दूध उत्पादन में भारत की क्या स्थिति है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए डेयरी क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत 23 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक वार्षिक उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। डेयरी सहकारी मॉडल, यानी अमूल या आनंद पैटर्न, से 17 करोड़ से अधिक दूध उत्पादक जुड़े हैं। यह भारत में ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
ICAR-NDDB MoU से राजस्थान को क्या लाभ होगा?
राजस्थान में मवेशियों और भैंसों की बड़ी आबादी है तथा डेयरी सहकारी समितियों का व्यापक नेटवर्क है। ICAR-NDDB MoU से राजस्थान को बेहतर नस्ल अनुसंधान, उन्नत रोग प्रबंधन और राज्य के डेयरी किसानों एवं सहकारी समितियों तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारतीय डेयरी में आनंद पैटर्न (अमूल मॉडल) क्या है और उसमें NDDB की क्या भूमिका है?
आनंद पैटर्न, जिसे अमूल और श्वेत क्रांति ने लोकप्रिय बनाया, गाँव के दूध उत्पादकों, जिला संघों और राज्य संघों को जोड़ने वाली तीन-स्तरीय सहकारी संरचना है। NDDB (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) की स्थापना इसी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने के लिए की गई थी और यह पूरे भारत में डेयरी सहकारी विकास, प्रौद्योगिकी और नीति लागू करने में मदद करता रहता है।
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