भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) गगनयान, भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन, के लिए क्रू मॉड्यूल की रिकवरी प्रक्रियाएं तैयार कर रहा है। इंजीनियर गति कम करने वाली बहु-चरणीय प्रणाली की जांच कर रहे हैं, जिसमें वायुमंडलीय खिंचाव, क्रमवार पैराशूट खुलना और भारतीय तट के पास समुद्र में स्प्लैशडाउन शामिल हैं। भारतीय नौसेना को लैंडिंग के बाद चालक दल को निकालने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है और वह रिकवरी अभ्यासों में इसरो के साथ समन्वय कर रही है। गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य मानव उड़ान के लिए प्रमाणित एलवीएम3 (एचएलवीएम3) प्रक्षेपण यान से 3-सदस्यीय चालक दल को 400 किमी निम्न पृथ्वी कक्षा में तीन-दिवसीय मिशन के लिए भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की भारत की क्षमता दिखाना है। क्रू मॉड्यूल की पुनः प्रवेश व्यवस्था के प्रमुख घटकों में 1,500 डिग्री सेल्सियस से अधिक पुनः प्रवेश गर्मी सहने वाली थर्मल सुरक्षा टाइलें, एक शंक्वाकार हीट शील्ड, सुपरसोनिक गति पर शुरुआती गति-कमी के लिए ड्रोग पैराशूट तथा अंतिम अवतरण के लिए पायलट एवं मुख्य पैराशूट शामिल हैं। क्रू एस्केप सिस्टम, जिसका 2023 में टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान में सफल प्रदर्शन हो चुका है, प्रक्षेपण के दौरान आपात स्थिति आने पर मिशन को निरस्त करेगा। मानवयुक्त मिशन से पहले, इसरो ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र को ले जाने वाली मानव रहित परीक्षण उड़ानें करने की योजना बना रहा है। गगनयान मिशन 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) के निर्माण तथा 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर उतारने की भारत की घोषणा का पूरक है। गगनयान कैप्सूल का कार्गो संस्करण नियोजित अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भविष्य के पुनः आपूर्ति मिशनों में भी काम आ सकता है। यह कार्यक्रम वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।