नामीबिया में जन्मी चीता ज्वाला ने 9 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच शावकों को जन्म दिया, जिसके बाद भारत में चीतों की आबादी 53 तक पहुंच गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की घोषणा की। यह सितंबर 2022 में शुरू हुए भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम की निरंतर प्रगति को दिखाता है। यह ज्वाला की तीसरी सफल प्रसूति है और पुनर्वास शुरू होने के बाद भारतीय धरती पर जन्मा दसवां चीता शावक समूह है। भारत में जन्मे चीता शावकों की संख्या 33 हो गई है, जो कार्यक्रम की बढ़ती व्यवहार्यता को दर्शाती है। प्रोजेक्ट चीता, दुनिया की पहली अंतरमहाद्वीपीय बड़ी बिल्ली पुनर्वास परियोजना, में शुरुआत में सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से बारह चीते लाए गए। फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ अतिरिक्त चीते लाए गए। यह कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान की वैज्ञानिक देखरेख में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के तहत संचालित होता है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान 748 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसे शिकार की उपयुक्त उपलब्धता तथा घास के मैदानों वाले आवास के कारण चुना गया था। चीतों की बढ़ती आबादी को देखते हुए क्षेत्रीय संघर्ष रोकने के लिए उन्हें छोड़ने के अतिरिक्त स्थलों की पहचान जरूरी है।