यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई एक भुगतान प्रणाली है, जिसका संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई करता है। एनपीसीआई को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत इसकी अनुमति मिली है। एनपीसीआई के अनुसार जून 2026 तक यूपीआई पर 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके थे।

लेनदेन की संख्या 2021-22 में 4,595.61 करोड़ थी। यह 2022-23 में 8,371.44 करोड़, 2023-24 में 13,112.95 करोड़, 2024-25 में 18,586.60 करोड़ और 2025-26 में 24,161.69 करोड़ हो गई। इसी अवधि में लेनदेन की कुल राशि ₹84.16 लाख करोड़ से बढ़कर क्रमशः ₹139.15 लाख करोड़, ₹199.95 लाख करोड़, ₹260.56 लाख करोड़ और ₹314.23 लाख करोड़ पहुंची।

एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड, एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। अप्रैल 2020 में बनी यह कंपनी विदेशी संस्थाओं के साथ यूपीआई और रुपे को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाती है। इससे भारतीय पर्यटकों व प्रवासी भारतीयों को सीमा पार भुगतान में सुविधा मिलती है और साझेदारों को तुरंत भुगतान की व्यवस्था या घरेलू कार्ड योजना बनाने में मदद मिलती है। यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव में व्यक्ति-से-व्यक्ति धन भेजना और व्यक्ति-से-व्यापारी भुगतान, दोनों शामिल हैं। सूचीबद्ध साझेदारियों में भूटान, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ग्रीस और कंबोडिया शामिल हैं।

सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई ने सुरक्षा के लिए जोखिम के आधार पर लेनदेन सीमा, बिना अनुमति मोबाइल नंबर बदलने और संदेश-आधारित पहचान की पुष्टि के दुरुपयोग से बचाव तथा यूपीआई अनुप्रयोगों के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं। एनपीसीआई ने व्यापक यूपीआई सूचना सुरक्षा ढांचा 2025 और मोबाइल अनुप्रयोग सुरक्षा ढांचा भी जारी किया है, जिनमें उन्नत सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए गए हैं।