भारत ने 27 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम तट से बंगाल की खाड़ी में परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिघात से K-4 पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल परीक्षण किया। K-4 एक कनस्तर-प्रक्षेपित SLBM है जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी है और यह 2.5 टन तक के परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है। DRDO द्वारा विकसित और BDL द्वारा निर्मित इस सफल परीक्षण ने मिसाइल के पूर्ण परिचालन मापदंडों की पुष्टि की। INS अरिघात, भारत के अरिहंत श्रेणी के SSBN बेड़े का दूसरा जहाज, अगस्त 2024 में कमीशन हुआ था। SSBN को भारत के परमाणु त्रय — भूमि-आधारित मिसाइलें, विमान से ले जाए जाने वाले बम और समुद्र-आधारित मिसाइलें — की सबसे अधिक बची रह सकने वाली कड़ी माना जाता है, क्योंकि ये भारत पर परमाणु प्रथम प्रहार के बाद भी द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करते हैं। K-4 मिसाइल, INS अरिहंत पर पहले से तैनात K-15 सागरिका (750 किमी) की तुलना में समुद्र-आधारित निवारक की मारक दूरी को काफी बढ़ाती है। 3,500 किमी की मारक क्षमता के साथ, हिंद महासागर में गश्त करने वाली K-4 से लैस पनडुब्बियाँ विरोधी क्षेत्र के गहरे अंदर स्थित लक्ष्यों को विश्वसनीय रूप से निशाने पर ला सकती हैं, जिससे भारत के 'पहले इस्तेमाल नहीं' (NFU) परमाणु सिद्धांत की विश्वसनीयता मजबूत होती है।
INS अरिघात से K-4 पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण: भारत की द्वितीय प्रहार परमाणु निवारक क्षमता मजबूत
भारत ने 27 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम तट से बंगाल की खाड़ी में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिघात से K-4 पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल परीक्षण किया। K-4 कनस्तर से प्रक्षेपित होने वाली SLBM है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी है और यह 2.5 टन तक के परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है। DRDO द्वारा विकसित और BDL द्वारा निर्मित इस मिसाइल के सफल परीक्षण से इसके पूर्ण परिचालन मापदंडों की पुष्टि हुई। INS अरिघात, भारत के अरिहंत श्रेणी के SSBN बेड़े का दूसरा जहाज, अगस्त 2024 में कमीशन हुआ था। SSBN को भारत के परमाणु त्रय — भूमि-आधारित मिसाइलें, विमान-वाहित बम और समुद्र-आधारित मिसाइलें — का सबसे अधिक सुरक्षित घटक माना जाता है, क्योंकि ये भारत पर परमाणु प्रथम प्रहार के बाद भी द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करते हैं। K-4 मिसाइल, INS अरिहंत पर पहले से तैनात K-15 सागरिका (750 किमी) की तुलना में समुद्र-आधारित निवारक की पहुंच को काफी बढ़ाती है। 3,500 किमी की मारक क्षमता के साथ, हिंद महासागर में गश्त करने वाली K-4 से लैस पनडुब्बियाँ विरोधी क्षेत्र के भीतर गहरे स्थित लक्ष्यों को विश्वसनीय रूप से निशाना बना सकती हैं, जिससे भारत के 'पहले परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने' (NFU) परमाणु सिद्धांत की विश्वसनीयता मजबूत होती है।
मुख्य तथ्य
- भारत ने 27 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में INS अरिघात से K-4 SLBM का सफल परीक्षण किया।
- K-4 की मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी है और यह 2.5 टन परमाणु वारहेड ले जा सकती है।
- मिसाइल DRDO द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित है।
- INS अरिघात भारत की अरिहंत श्रेणी की दूसरी परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
- इस परीक्षण से परमाणु त्रय के तहत भारत की द्वितीय प्रहार निवारक क्षमता मजबूत हुई।
- K-4 ठोस प्रणोदक वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी के कनस्तर से प्रक्षेपित किया जाता है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण के रणनीतिक और तकनीकी महत्त्व का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए, विशेष रूप से भारत की मिसाइल और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में। — दोनों स्वदेशी मिसाइल प्रौद्योगिकी विकास तथा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता एवं प्रतिरोध स्थिति के लिए उसके रणनीतिक महत्व से संबंधित हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के परमाणु त्रय और नो फर्स्ट यूज सिद्धांत के लिए आईएनएस अरिघात से के-4 पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल के सफल परीक्षण के रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
27 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम तट से परीक्षण DRDO-बीडीएल के-4 कनस्तर से प्रक्षेपित एसएलबीएम है, जिसकी मारक क्षमता 3,500 किमी और परमाणु वारहेड-भार 2.5 टन तक है। अगस्त 2024 में कमीशन अरिहंत-श्रेणी आईएनएस अरिघात पर तैनात यह के-15 सागरिका की 750 किमी सीमा से आगे पनडुब्बी प्रतिरोध बढ़ाकर द्वितीय-प्रहार क्षमता सुदृढ़ करता है।
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भारत की के-4 पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता कितनी है?
के-4 भारत की अरिहंत-श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों के लिए विकसित पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी सामान्य रूप से बताई गई मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है, जो के-15/सागरिका जैसी कम दूरी की प्रणाली से काफी अधिक है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
K-4 मिसाइल क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
K-4 एक पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी है और यह 2.5 टन तक का परमाणु वारहेड ले जा सकती है। यह भारत की द्वितीय प्रहार परमाणु निवारक क्षमता को मजबूत करती है, जो परमाणु त्रय का एक अहम हिस्सा है।
K-4 SLBM का परीक्षण किस पनडुब्बी से और कब किया गया?
K-4 का सफल परीक्षण 27 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम तट से बंगाल की खाड़ी में INS अरिघात से किया गया। INS अरिघात भारत की अरिहंत श्रेणी की दूसरी परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
K-4 मिसाइल को किसने विकसित और निर्मित किया?
K-4 SLBM को DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने विकसित किया और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) ने बनाया। यह ठोस प्रणोदक पर आधारित मिसाइल है, जिसे कैनिस्टर से प्रक्षेपित किया जाता है।
परमाणु त्रय क्या होता है और K-4 परीक्षण का इससे क्या संबंध है?
परमाणु त्रय का अर्थ है — भूमि, वायु और पनडुब्बी से परमाणु हथियार दागने की क्षमता। INS अरिघात से K-4 का सफल परीक्षण भारत के त्रय की समुद्री क्षमता को मजबूत करता है, जिससे पहले हमले के बाद भी जवाबी हमले की क्षमता बनी रहती है।
SSBN क्या होती है और INS अरिघात भारत की रणनीतिक शक्ति के लिए क्यों जरूरी है?
SSBN (परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी) लंबे समय तक समुद्र में छिपकर परमाणु मिसाइलें दाग सकती है। INS अरिघात भारत की दूसरी अरिहंत-श्रेणी SSBN है, जो भारत की समुद्री परमाणु निवारक क्षमता को और विश्वसनीय बनाती है।
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