DRDO के अंतर्गत रक्षा भूसूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और ISRO के अंतर्गत अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) ने 25 फरवरी 2026 को SAC अहमदाबाद में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता अंतरिक्ष-आधारित तकनीक से हिमालय में हिम आवरण की निगरानी और पर्वतीय मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए है। ये दोनों काम भारतीय सेना के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाले अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सहयोग चार क्षेत्रों पर केंद्रित है: (1) हिम आवरण, ग्लेशियर और भूभाग मापदंडों के लिए उपग्रह-आधारित एल्गोरिदम का विकास; (2) उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह मौसम पूर्वानुमान का एकीकरण; (3) हिमालयी क्षेत्र के लिए भू-स्थानिक उत्पादों में मैदानी डेटा और उपग्रह चित्रों की साझेदारी; (4) क्रायोस्फीयर विज्ञान में क्षमता निर्माण। DGRE का काम हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना को हिम, भूभाग और मौसम से जुड़ा विशेष, रीयल-टाइम डेटा देना है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों पर बढ़ते खतरे और हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOFs) की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर यह सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
DRDO-ISRO ने हिमालयी हिम आवरण की निगरानी और पर्वतीय मौसम विज्ञान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए समझौता किया
DRDO के DGRE और ISRO के SAC ने हिमालयी हिम आवरण की निगरानी और पर्वतीय मौसम विज्ञान में अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
मुख्य तथ्य
- DGRE (DRDO) और SAC (ISRO) ने 25 फरवरी 2026 को SAC अहमदाबाद में MoU पर हस्ताक्षर किए
- उद्देश्य: हिमालयी हिम आवरण की निगरानी और पर्वतीय मौसम विज्ञान के लिए अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग
- मुख्य क्षेत्र: हिम और ग्लेशियरों के लिए उपग्रह एल्गोरिदम, उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान, भू-स्थानिक डेटा साझाकरण, क्रायोस्फीयर क्षमता निर्माण
- DGRE भारतीय सेना को हिमालयी अभियानों के लिए हिम, भूभाग और मौसम संबंधी डेटा देता है
- SAC अंतरिक्ष-जनित उपकरणों और रिमोट सेंसिंग के लिए ISRO का प्रमुख R&D केंद्र है
- संदर्भ: जलवायु परिवर्तन से हिमालयी ग्लेशियरों को खतरा; GLOF घटनाओं में बढ़ोतरी; राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: हिमालयी हिम आवरण निगरानी एवं पर्वतीय मौसम विज्ञान के लिए फरवरी 2026 में डीजीआरई और एसएसी के बीच हस्ताक्षरित DRDO-इसरो समझौते के रणनीतिक तथा वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
25 फरवरी 2026 को एसएसी अहमदाबाद में हस्ताक्षरित डीजीआरई-एसएसी समझौता उपग्रह पुनर्प्राप्ति एल्गोरिद्म, उच्च-विभेदन मौसम पूर्वानुमान, क्षेत्रीय आंकड़ों की साझेदारी और हिमांकमंडल संबंधी क्षमता निर्माण का उपयोग करेगा। यह भारतीय सेना के अधिक ऊंचाई वाले अभियानों, हिमस्खलन एवं हिमनद झील विस्फोट बाढ़ पूर्वानुमान में सुधार तथा जलवायु के कारण होने वाले हिमालयी परिवर्तनों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
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हिमालयी मौसम विज्ञान पर DRDO-ISRO सहयोग (MoU, फरवरी 2026) हिमालय को प्रभावित करने वाली निम्नलिखित में से किस जलवायु घटना से जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित है?
डीआरडीओ-इसरो समझौता ज्ञापन हिमनद झील फटने से आने वाली बाढ़ की बढ़ती चिंता से जुड़ा है। हिमालय में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं, इसलिए यह बड़ा खतरा बनता जा रहा है। समय पर चेतावनी देने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हिम आवरण, हिमनदों से जुड़े मापदंडों तथा पर्वतीय मौसम की सटीक निगरानी जरूरी है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित DRDO-ISRO MoU का उद्देश्य क्या है?
हिमालयी हिम आवरण और ग्लेशियर से जुड़े मानकों की निगरानी तथा पर्वतीय मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग — ताकि भारतीय सेना के उच्च-ऊंचाई अभियानों में मदद मिल सके।
MoU पर किन संगठनों ने हस्ताक्षर किए?
DRDO के अंतर्गत रक्षा भूसूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और ISRO के अंतर्गत अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC)।
DGRE क्या है?
रक्षा भूसूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान — DRDO की एक प्रयोगशाला, जो हिमालयी अभियानों के लिए भारतीय सेना को हिम, भूभाग और मौसम से जुड़ा वास्तविक समय का डेटा देती है।
SAC क्या है?
अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र — ISRO का प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र, जो संचार, नेविगेशन और रिमोट सेंसिंग के लिए अंतरिक्ष आधारित उपकरण विकसित करता है।
यह सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
जलवायु परिवर्तन से हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना तेज़ हो रहा है, GLOF का खतरा बढ़ रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
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