भारत को सिंगापुर में आयोजित 25वें एशियाई क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान इंटरपोल एशियाई समिति का सदस्य चुना गया। यह घटना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग और कानून-प्रवर्तन कूटनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरपोल एशिया क्षेत्र में सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए देशों के बीच समन्वय को मजबूत करता है। भारत की सदस्यता से संगठित अपराध, साइबर अपराध, मानव तस्करी, आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर क्षेत्रीय सहयोग में उसकी भूमिका बढ़ती है।

इंटरपोल का पूरा नाम अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन है और यह 196 सदस्य देशों के बीच सीमा पार अपराध से निपटने में सहयोग आसान बनाता है। इसकी एशियाई समिति एशिया क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय प्रशासनिक और प्राथमिकता-निर्धारण निकाय के रूप में काम करती है। इसलिए भारत का चुनाव सिर्फ एक ओहदे की उपलब्धि भर नहीं है; यह क्षेत्रीय कानून-प्रवर्तन प्राथमिकताओं, सूचना-साझेदारी और बहुपक्षीय पुलिस सहयोग तय करने में भारत की भूमिका को मजबूत बनाता है।

परीक्षा में इस घटना से इंटरपोल की संरचना, एशियाई समिति की भूमिका और सीमा पार अपराधों पर क्षेत्रीय समन्वय जैसे बिंदुओं पर प्रश्न बन सकते हैं। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे संगठन-आधारित तथ्य, क्षेत्रीय सहयोग, साइबर अपराध, मानव तस्करी और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर प्रश्न बन सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग भारत की वैश्विक सुरक्षा भूमिका, बहुपक्षीय संस्थाओं में भागीदारी और सीमा पार अपराधों से निपटने की रणनीति के उदाहरण के रूप में किया जा सकता है। स्टैटिक जीके में इंटरपोल, उसके सदस्य देश, अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग और क्षेत्रीय समितियों की भूमिका को इस करेंट अफ़ेयर्स से जोड़कर पढ़ना उपयोगी रहेगा।