सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने नवंबर 2025 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें पूरे साल भारत में हुई चरम मौसम घटनाओं का विवरण दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में वर्ष के 99% दिनों में कोई न कोई चरम मौसम घटना दर्ज की गई, जो देश में गहराते जलवायु संकट की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े चौंकाने वाले हैं: अलग-अलग चरम मौसम घटनाओं में 4,064 लोगों की जान गई। कृषि क्षेत्र में तबाही भी उतनी ही गहरी रही — 94.7 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ और 99,533 घर तबाह हो गए।
दर्ज की गई चरम मौसम घटनाओं में लू और शीत लहर, बाढ़, बिजली गिरना, बादल फटना और चक्रवात शामिल हैं। पूर्वी और मध्य भारत के ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। हिमालयी राज्यों में बादल फटने और हिमनद झील विस्फोट बाढ़ की घटनाएं बढ़ीं, जबकि प्रायद्वीपीय भारत में चक्रवात और असमय बारिश ने कहर बरपाया।
CSE के शोधकर्ताओं ने इस तीव्रता का कारण मानव-जनित जलवायु परिवर्तन को बताया है। बढ़ते वैश्विक तापमान, अस्त-व्यस्त मानसून और वायुमंडल में बढ़ती नमी इसके मुख्य कारण हैं। रिपोर्ट में शीघ्र चेतावनी प्रणालियों, जलवायु-अनुकूल कृषि और आपदा तैयारी में अधिक निवेश की मांग की गई है।
यह डेटा बेलेम में COP30 वार्ता में भारत की स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ देता है, जहां भारत को विकास की जरूरतों और जलवायु चरम घटनाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता कम करने की जरूरत के बीच संतुलन साधना है।
