भारत ने दिसंबर 2025 में जैव विविधता अभिसमय (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय जैव विविधता रिपोर्ट सौंपी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में पाया गया कि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (GBF) के 23 लक्ष्यों में से केवल 2 ही सही दिशा में हैं — 2030 की समयसीमा से पहले यह एक गंभीर चेतावनी है।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल GBF दिसंबर 2022 में COP15 में अपनाया गया था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण 30x30 प्रतिबद्धता है — 2030 तक पृथ्वी की 30% भूमि और महासागरों की सुरक्षा। भारत में अभी संरक्षित क्षेत्रों का दायरा लगभग 5.03% है, जो 30x30 लक्ष्य से बहुत दूर है।

सबसे चिंताजनक तथ्य वन डायवर्जन से जुड़ा है। रिपोर्टिंग अवधि में लगभग 29,000 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्ट हुई — यह एक दशक का उच्चतम स्तर है। सड़क, खनन और रैखिक अवसंरचना के लिए वन भूमि का रूपांतरण CBD लक्ष्यों के विपरीत है।

भारत जिन दो लक्ष्यों पर सही दिशा में है, वे हैं — मीठे पानी की गुणवत्ता की निगरानी और नियंत्रित कार्यक्रमों के तहत कुछ आक्रामक विदेशी प्रजातियों में कमी। वेटलैंड संरक्षण, प्रजातियों की बहाली की योजनाएँ, वन डायवर्जन रोकना और जैव विविधता को उत्पादन क्षेत्रों में शामिल करना — इन क्षेत्रों में प्रगति 'अपर्याप्त' या 'पटरी से उतरी' श्रेणी में है।

विशेषज्ञों ने कहा कि 30x30 प्रतिबद्धता के लिए भारत को पाँच वर्षों में अपना संरक्षित भूमि क्षेत्र लगभग तिगुना करना होगा — जिसके लिए भूमि उपयोग शासन में मूलभूत नीतिगत बदलाव जरूरी है।