प्रकाशित: 10 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 संसद में पेश
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 दिसंबर 2025 में संसद में पेश किया गया। इसे 1956 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अधिनियम के बाद भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना में संभवतः सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है।
विधेयक तीन मौजूदा संस्थाओं — विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) — को समाप्त कर विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान नामक नई शीर्ष संस्था के अंतर्गत तीन परिषदों वाली व्यवस्था लाने का प्रस्ताव करता है। ये तीन परिषदें अलग-अलग विनियमन, प्रत्यायन और अकादमिक मानकों का काम देखेंगी।
विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया, जो इसकी जटिलता और हितधारकों की चिंताओं को दर्शाता है। मुख्य प्रावधानों में: वर्तमान सूत्र-आधारित UGC अनुदान की जगह प्रदर्शन-आधारित अनुदान प्रणाली; एकल राष्ट्रीय मान्यता ढांचा; शीर्ष रैंक वाले विश्वविद्यालयों के लिए अधिक संस्थागत स्वायत्तता; और भारत में कार्यरत विदेशी विश्वविद्यालयों को विनियमित करने के प्रावधान शामिल हैं।
आलोचकों ने शैक्षणिक प्राधिकार के केंद्रीकरण, उच्च शिक्षा में राज्य सरकारों की भूमिका के संभावित कमजोर होने (शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है) और सुधार की गति पर चिंता जताई है। समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा तीन संस्थाओं वाली प्रणाली नियामक अतिव्यापन और प्रशासनिक देरी पैदा करती है।
RPSC RAS अभ्यर्थियों के लिए, यह विधेयक GS पेपर III (शिक्षा नीति, शासन, NEP 2020 कार्यान्वयन) के लिए प्रासंगिक है और राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ता है: राज्य में 61+ विश्वविद्यालय हैं और यह NEP 2020 सुधार लागू कर रहा है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के बाद भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना पर उसके प्रभावों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
दिसंबर 2025 में संसद में प्रस्तुत और संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया यह विधेयक यूजीसी, एआईसीटीई एवं एनसीटीई को समाप्त कर विनियमन, प्रत्यायन और अकादमिक मानकों के लिए परिषदों वाला शीर्ष ढांचा प्रस्तावित करता है। प्रावधानों में प्रदर्शन-आधारित अनुदान, एकल प्रत्यायन ढांचा, संस्थागत स्वायत्तता तथा विदेशी विश्वविद्यालयों का विनियमन शामिल हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 क्या प्रस्तावित करता है?
यह UGC, AICTE और NCTE को समाप्त करके उन्हें एक नई शीर्ष संस्था — विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान — के तहत तीन परिषदों से बदलने का प्रस्ताव करता है, जो सामान्य उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और शिक्षक शिक्षा को अलग-अलग देखेंगी।
यह विधेयक ऐतिहासिक क्यों माना जाता है?
यह 1956 में UGC अधिनियम बनने के बाद से भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना का सबसे बड़ा सुधार है, जो लगभग 70 साल पहले था।
इस संदर्भ में JPC की क्या भूमिका है?
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) दोनों सदनों के सांसदों का एक समूह है जो किसी जटिल विधेयक की विस्तार से जांच करने, हितधारकों के विचार लेने और सिफारिशें देने के लिए बनाया जाता है।
शिक्षा का समवर्ती सूची पर होना यहाँ क्यों महत्वपूर्ण है?
शिक्षा समवर्ती सूची (सूची III की प्रविष्टि 25) पर है, यानी केंद्र और राज्य सरकारें दोनों इस पर कानून बना सकती हैं। आलोचकों को चिंता है कि यह विधेयक उच्च शिक्षा शासन में राज्य की स्वायत्तता को कम कर सकता है।
यह NEP 2020 से कैसे जुड़ता है?
विधेयक को NEP 2020 कार्यान्वयन का हिस्सा माना जाता है, जिसने उच्च शिक्षा की खंडित नियामक संरचना को एकल नियामक (HECI) में समेकित करने की सिफारिश की थी।