राजस्थान में जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ी, जिसके बाद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राजस्थान कृषि विभाग ने प्रदेश के किसानों के लिए संयुक्त फसल परामर्श जारी किया। बीकानेर, चुरू और सीकर जिलों में तापमान 2-3°C तक गिर गया, जिससे खड़ी फसलों को पाले से नुकसान की गंभीर आशंका पैदा हो गई।

फसल परामर्श में विशेष रूप से सरसों, गेहूं और चना — राजस्थान की तीन प्रमुख रबी फसलों — की खेती करने वाले किसानों को तत्काल सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी गई। सरसों फूल आने और फली भरने के समय पाले के प्रति बेहद संवेदनशील होती है, जबकि गेहूं और चने में 4°C से नीचे तापमान रहने पर पैदावार को भारी नुकसान हो सकता है।

किसानों को सुबह जल्दी या शाम को खेतों की हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई, ताकि मिट्टी का तापमान बढ़ सके और पाले का असर कम हो। हल्की सिंचाई पौधों को प्रत्यक्ष पाले से बचाती है। कृषि विशेषज्ञों ने पाला प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गंधक के चूर्ण या पोटेशियम आधारित स्प्रे के उपयोग की भी सिफारिश की।

उत्तरी राजस्थान के जिलों में घने कोहरे की चेतावनी भी जारी की गई, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई और मंडियों तक कृषि उपज परिवहन बाधित हुआ। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) को शीत लहर से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखा गया। राजस्थान सरकार ने सबसे प्रभावित जिलों — बीकानेर, चुरू, सीकर, गंगानगर और हनुमानगढ़ — के जिला कलेक्टरों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। PMFBY के अंतर्गत फसल नुकसान के मुआवजे के लिए कृषि बीमा हेल्पलाइन भी सक्रिय की गई।