23 मार्च 2026 को विश्व मौसम विज्ञान दिवस 'आज अवलोकन, कल की सुरक्षा' विषय पर मनाया गया। यह दिन 23 मार्च 1950 को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना की याद में मनाया जाता है, जब राष्ट्रीय मौसम सेवाओं को संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के अधीन एक साथ लाया गया। इसे पहली बार औपचारिक रूप से 23 मार्च 1961 को मनाया गया था।

2026 का विषय मौसम केंद्रों, रेडियोसोंड, महासागरीय बॉय, उपग्रहों और डॉपलर रडारों सहित मज़बूत अवलोकन नेटवर्क के महत्व को रेखांकित करता है, जो सटीक पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जलवायु निगरानी के लिए अनिवार्य हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत इस अवसर पर 800 से अधिक स्वचालित मौसम स्टेशनों, 37 डॉपलर मौसम रडारों (2027 तक 60 का लक्ष्य) और WMO के ग्लोबल बेसिक ऑब्जर्विंग नेटवर्क में योगदान को रेखांकित किया। IMD का 'मौसम' ऐप अब 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं को सेवा देता है।

राजस्थान के लिए सटीक मौसम अवलोकन अत्यंत महत्वपूर्ण है — राज्य में शुष्क थार मरुस्थल (60% से अधिक क्षेत्र), अर्धशुष्क संक्रमण क्षेत्र और अरावली पट्टी शामिल हैं। मौसम निगरानी से खरीफ-रबी फसल योजना, टिड्डी नियंत्रण, हाड़ौती में अचानक बाढ़ का पूर्वानुमान और चूरू, बाड़मेर, बीकानेर जैसे जिलों — जो भारत के सर्वाधिक तापमान दर्ज करते हैं — में लू की तैयारी को बल मिलता है।