राजस्थान की कृषि: प्रमुख फसलें, उत्पादन, वितरण
मुख्य तथ्य
- राजस्थान की लगभग 70% जनसंख्या कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है; कृषि GSDP में ~21% का योगदान करती है।
- राजस्थान भारत में सरसों (~46.13%), बाजरा (~44.66%) और ग्वार (~90.36%) का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 267.67 लाख टन; तिलहन 96.17 लाख टन; कपास 18.45 लाख गाँठें।
- राजस्थान का IMD-आधारित भौगोलिक औसत वर्षा ~531 मिमी/वर्ष है, परंतु पश्चिमी मरुस्थलीय कृषि-क्षेत्र भारित औसत ~313 मिमी रहता है।
- केवल ~37% कृषि क्षेत्र सिंचित है; कुएं/नलकूप ~70% सिंचित क्षेत्र का स्रोत हैं; नहरें ~20%।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान की लगभग 70% जनसंख्या कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है; कृषि GSDP में ~21% का योगदान करती है।
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राजस्थान भारत में सरसों (~46.13%), बाजरा (~44.66%) और ग्वार (~90.36%) का सबसे बड़ा उत्पादक है।
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राजस्थान जौ उत्पादन में और धनिया-जीरा उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर है।
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2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 267.67 लाख टन; तिलहन 96.17 लाख टन; कपास 18.45 लाख गाँठें।
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राजस्थान का IMD-आधारित भौगोलिक औसत वर्षा ~531 मिमी/वर्ष है, परंतु पश्चिमी मरुस्थलीय कृषि-क्षेत्र भारित औसत ~313 मिमी रहता है।
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केवल ~37% कृषि क्षेत्र सिंचित है; कुएं/नलकूप ~70% सिंचित क्षेत्र का स्रोत हैं; नहरें ~20%।
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राजस्थान में 10 कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं, जिनमें वर्षा, मिट्टी एवं भूभाग के आधार पर फसल प्रारूप भिन्न हैं।
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पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र: बाजरा, ग्वार, मोठ (खरीफ) + गेहूँ, सरसों, जीरा (रबी); पूर्वी क्षेत्र: गेहूँ, सरसों, चना।
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इंदिरा गाँधी नहर परियोजना ने थार मरुस्थल के ~14 लाख हेक्टेयर को कृषि योग्य बनाया।
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किन्नू संतरा (श्रीगंगानगर), खजूर (जैसलमेर), मिर्च (जोधपुर/मथानिया) और धनिया (बारां, झालावाड़) प्रमुख बागवानी उत्पाद हैं।
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राजस्थान ऊन उत्पादन में भारत में प्रथम (~45% राष्ट्रीय उत्पादन) है; थारपारकर गाय, राठी गाय, नागौरी बैल, मारवाड़ी घोड़ा प्रसिद्ध नस्लें हैं।
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राजस्थान मूँगफली उत्पादन में भारत में द्वितीय (~18.76%) और चना, ज्वार, कुल दलहन व सोयाबीन में तृतीय स्थान पर है।
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राजस्थान कृषि नीति 2023 का लक्ष्य 2027 तक किसानों की आय दोगुनी करना और 11 लाख अतिरिक्त हेक्टेयर पर ड्रिप/सूक्ष्म सिंचाई है।
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मार्च 2026 में राजस्थान कृषि विभाग ने IORA इकोलॉजिकल सॉल्यूशंस के साथ कार्बन क्रेडिट पायलट परियोजना के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
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18 फरवरी 2026 को जयपुर में 'भारत-विस्तार' एआई कृषि प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च हुआ; हेल्पलाइन 155261 पर उपलब्ध।
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परिचय एवं पाठ्यक्रम
RPSC 2026 के प्रश्नपत्र द्वितीय, इकाई 3 (पृथ्वी विज्ञान/भूगोल) के पाठ्यक्रम में कृषि भूगोल को भाग C के अंतर्गत शामिल किया गया है। यह विषय भौतिक भूगोल (जलवायु, मिट्टी, जल) और आर्थिक भूगोल (फसल प्रतिरूप, उत्पादन आंकड़े, क्षेत्रीय विशेषीकरण) के संगम पर है। परीक्षक का ध्यान राजस्थान-विशिष्ट आंकड़ों पर केंद्रित है: कौन-सी फसल कहाँ, कितनी मात्रा में उगाई जाती है और राजस्थान की कृषि भूगोल अन्य राज्यों से क्या अलग करती है।
RPSC जिन तीन धुरियों पर परखता है, वे हैं: (1) प्रमुख फसलें — मौसम (खरीफ/रबी/जायद) के आधार पर पहचान, उनकी राष्ट्रीय रैंक और क्षेत्रीय संकेंद्रण; (2) उत्पादन — राजस्थान आर्थिक समीक्षा के क्षेत्र, उपज और उत्पादन के आंकड़े; (3) वितरण — कृषि-जलवायु क्षेत्र और जिला-स्तरीय फसल भूगोल।
सन्निकट विषयों की सीमा: विषय #84 (जलवायु) बताता है कि राजस्थान शुष्क क्यों है — वह संरचनात्मक व्याख्या यहाँ पूर्वमान्य है, दोहराई नहीं गई। विषय #86 (मिट्टी) जलोढ़, रेतीली-मरुस्थलीय, काली कपास और लाल-पीली मिट्टियों की व्याख्या करता है — मिट्टी-फसल सम्बन्ध के लिए क्रॉस-रेफरेंस करें। विषय तृतीय3 (अर्थशास्त्र) सिंचाई अवसंरचना, सहकारी खेती और एमएसपी नीति को विस्तार से कवर करता है — यह अध्याय उत्पादन नीति नहीं, बल्कि उत्पादन के भूगोल पर केंद्रित है।
पीवाईक्यू स्तर 4 (कभी-कभी) का अर्थ है यह विषय पाँच में से लगभग एक परीक्षा में आता है। तथापि, 2026 के संशोधित पाठ्यक्रम में "प्रमुख फसलें, उत्पादन, वितरण" का स्पष्ट उल्लेख होने से राजस्थान की फसल रैंकिंग पर 5-अंकीय या कृषि-जलवायु क्षेत्र के फसल प्रतिरूप पर 10-अंकीय प्रश्न की सम्भावना मध्यम है। विशेष महत्व: राष्ट्रीय रैंकिंग (प्रथम पद) और आईजीएनपी का पश्चिमी राजस्थान पर परिवर्तनकारी प्रभाव।
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15Mराजस्थान की प्रमुख खरीफ और रबी फसलों के नाम बताइए। सरसों के प्रमुख उत्पादक जिले कौन से हैं?
मॉडल उत्तर
प्रमुख खरीफ फसलें: बाजरा, ग्वार, ज्वार, मूँगफली, कपास, मोठ, तिल। प्रमुख रबी फसलें: सरसों, गेहूँ, चना, जौ। राजस्थान भारत की ~46% सरसों उत्पादित करता है — प्रमुख जिले: भरतपुर, अलवर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर, सीकर, टोंक। सरसों हल्की जलोढ़ मृदा में पश्चिमी विक्षोभ की नमी पर पनपती है।
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