भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे की चेतावनी जारी की। राजस्थान में 2025-26 की सर्दियों के कुछ सबसे ठंडे दिन दर्ज हुए, जहाँ चुरू, सीकर, बीकानेर और फतेहपुर सहित कई जिलों में तापमान शून्य के करीब या उससे नीचे पहुँच गया। घने कोहरे से उत्तर भारत में सड़क परिवहन, रेल सेवाएँ और हवाई संपर्क प्रभावित हुए; जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों में देरी दर्ज हुई। दैनिक मजदूरों, बेघर लोगों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने रैन बसेरे सक्रिय किए और शहरी क्षेत्रों में कंबल वितरित किए। राजस्थान की कृषि के लिए शीतलहर और पाले ने रबी फसलों — गेहूँ, सरसों और चने — को लेकर चिंता बढ़ाई। IMD के पूर्वानुमान में पश्चिमी विक्षोभ और आर्कटिक वायु के प्रवेश का व्यापक पैटर्न दिखा, जो मौसम विज्ञानियों के अनुसार हाल के वर्षों में और तीव्र होता जा रहा है। इससे राजस्थान के पारंपरिक फसल कैलेंडर पर जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रभाव को लेकर सवाल उठे।
IMD ने 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे का पूर्वानुमान जताया: कृषि, परिवहन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे की चेतावनी जारी की। राजस्थान में 2025-26 की सर्दियों के सबसे ठंडे दिनों में से कुछ दर्ज किए गए, जहाँ चुरू, सीकर, बीकानेर और फतेहपुर सहित कई जिलों में तापमान शून्य के करीब या उससे नीचे पहुँच गया। घने कोहरे से उत्तर भारत में सड़क परिवहन, रेल सेवाएँ और हवाई आवाजाही प्रभावित हुई; जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों में देरी दर्ज की गई। दैनिक मजदूरों, बेघर लोगों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने रैन बसेरे चालू किए और शहरी क्षेत्रों में कंबल वितरित किए। राजस्थान की कृषि के लिए शीतलहर और पाला रबी फसलों — गेहूँ, सरसों और चने — को लेकर चिंता का कारण बने। IMD के पूर्वानुमान में पश्चिमी विक्षोभ और आर्कटिक हवा के प्रवेश का व्यापक पैटर्न दिखा, जिसके बारे में मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हाल के वर्षों में इसकी तीव्रता बढ़ रही है — इससे राजस्थान के पारंपरिक फसल कैलेंडर पर जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रभाव को लेकर सवाल उठते हैं।
मुख्य तथ्य
- IMD ने 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे का अनुमान जताया।
- चूरू, सीकर, बीकानेर और फतेहपुर में तापमान शून्य के करीब या नीचे गिर गया।
- घने कोहरे ने सड़क परिवहन, रेल सेवाओं और हवाई संपर्क को गंभीर रूप से बाधित किया।
- कम दृश्यता के कारण जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों में देरी दर्ज हुई।
- SDMA ने दैनिक मजदूरों और बेघरों के लिए राहत उपाय शुरू किए।
- उत्तरी राजस्थान के जिलों में रबी फसलों को पाले से नुकसान का खतरा था।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: IMD द्वारा लगाए गए पूर्वानुमान के आधार पर, 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे के कई क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
IMD ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा एवं दिल्ली में 5 जनवरी 2026 तक गंभीर शीतलहर और घने कोहरे की चेतावनी दी। चुरू, सीकर, बीकानेर, फतेहपुर में तापमान शून्य के आसपास या नीचे रहा। कोहरे से जयपुर हवाई अड्डे पर उड़ानें बाधित हुईं; गेहूँ, सरसों, चना जैसी रबी फसलों पर पाले का जोखिम बढ़ा। रैन बसेरे सक्रिय किए, कंबल बाँटे गए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनवरी 2026 की शीतलहर के दौरान राजस्थान के किन जिलों में शून्य के करीब तापमान रहा?
जनवरी 2026 की शुरुआत में गंभीर शीतलहर के दौरान चूरू, सीकर, बीकानेर और फतेहपुर राजस्थान के उन जिलों में से थे जहाँ तापमान शून्य के करीब या नीचे पहुँच गया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जनवरी 2026 में राजस्थान के लिए क्या चेतावनी जारी की?
IMD ने 5 जनवरी 2026 तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में गंभीर शीतलहर और घने कोहरे की चेतावनी जारी की, जिससे अधिकारियों और जनता को एहतियाती उपाय करने के लिए सचेत किया गया।
शीतलहर और कोहरे ने राजस्थान में परिवहन संपर्क को कैसे प्रभावित किया?
घने कोहरे ने उत्तर भारत में सड़क परिवहन, रेल सेवाओं और हवाई संपर्क को गंभीर रूप से बाधित किया। कम दृश्यता के कारण जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों में देरी दर्ज की गई।
जनवरी 2026 की शीतलहर के दौरान राजस्थान में कौन से राहत उपाय लागू किए गए?
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने दैनिक मजदूरों, बेघर लोगों और बुजुर्गों को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए राहत उपाय लागू किए, जिनमें आश्रय सुविधाओं की व्यवस्था भी शामिल थी।
शीतलहर से राजस्थान के कृषि क्षेत्र के लिए क्या जोखिम था?
उत्तरी राजस्थान के जिलों में गंभीर शीतलहर के दौरान रबी फसलों को पाले से नुकसान का बड़ा खतरा था, जिससे क्षेत्र के किसानों का शीतकालीन फसल सीजन जोखिम में पड़ गया।
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