प्रकाशित: 26 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
नीति आयोग की रिपोर्ट की चेतावनी: भारत में जीवनकाल पूरा कर चुके वाहन 2030 तक 5 करोड़ हो सकते हैं
नीति आयोग ने 22 जनवरी 2026 को रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी कि भारत में अपना जीवनकाल पूरा कर चुके वाहन (ELV) 2030 तक दोगुने होकर 5 करोड़ हो सकते हैं। वर्तमान में 500 आवश्यक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) में से केवल 156 चालू हैं, और ELV से जुड़े कामकाज पर अनौपचारिक क्षेत्र का दबदबा है।
सिफारिशों में ATS ढांचे का तेजी से विस्तार, पुनर्चक्रण क्षेत्र का औपचारिकीकरण, स्क्रैपेज प्रमाणपत्रों की डिजिटल ट्रैकिंग, और नए वाहन उत्पादन में पुनर्नवीनीकृत सामग्री का अनिवार्य उपयोग शामिल है। यह 2021 की वाहन स्क्रैपेज नीति के अनुरूप है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
नीति आयोग की जनवरी 2026 रिपोर्ट के अनुसार जरूरी 500 स्वचालित परीक्षण स्टेशनों की तुलना में वर्तमान में कितने स्टेशन क्रियाशील हैं?
व्याख्या · सही उत्तर ANITI Aayog की ELV रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 के MoRTH डेटा में 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 156 स्वचालित परीक्षण स्टेशन चालू थे। 2027 तक अनुमानित जरूरत 500 ATS की थी, यानी 344 सुविधाओं की कमी थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NITI आयोग की रिपोर्ट ने भारत में उपयोग-अवधि पूरी कर चुके वाहनों के बारे में क्या चेतावनी दी?
**NITI आयोग की रिपोर्ट** ने चेतावनी दी कि **भारत में उपयोग-अवधि पूरी कर चुके वाहनों (ELV) की संख्या दोगुनी होकर 5 करोड़** तक पहुंच सकती है। **ELV** वे वाहन हैं जो अपने उपयोगी जीवन से आगे निकल चुके हैं (यात्री वाहनों के लिए 15 वर्ष, वाणिज्यिक के लिए 20 वर्ष)। भारत में **30 करोड़+ पंजीकृत वाहनों** के बड़े बेड़े को देखते हुए, यह 2000 के दशक के उछाल के बाद वाहनों की उपयोग-अवधि पूरी होने की लहर को दिखाता है।
भारत की वाहन स्क्रैपेज नीति क्या है और यह उपयोग-अवधि पूरी कर चुके वाहनों की समस्या से कैसे निपटती है?
भारत की **वाहन स्क्रैपेज नीति (2021)** वाहनों की **फिटनेस जांच** और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने के लिए प्रोत्साहन देती है: (1) नया वाहन खरीदने पर **8-25% छूट**; (2) **पंजीकरण शुल्क माफी**; (3) पुराने वाहनों पर **हरित कर**; (4) देशभर में **पंजीकृत वाहन स्क्रैपेज सुविधाएं (RVSF)**; और (5) यात्री वाहनों के लिए **15 वर्ष** की वैधता।
भारत का ELV क्षेत्र पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिहाज से कौन-कौन से अवसर देता है?
भारत का **ELV क्षेत्र** कई महत्वपूर्ण अवसर देता है: (1) **महत्वपूर्ण सामग्री की रिकवरी** — प्रत्येक कार में 900+ kg स्टील, 50+ kg एल्युमीनियम, लिथियम (EV से); (2) **वृत्ताकार अर्थव्यवस्था** में योगदान; (3) **रोज़गार सृजन** — 3 लाख+ कामगार; (4) **प्रदूषण में कमी** — पुराने वाहन नए वाहनों की तुलना में 10-40 गुना अधिक प्रदूषण करते हैं।
पंजीकृत वाहन स्क्रैपेज सुविधाएं (RVSF) क्या हैं और भारत में कितनी चालू हैं?
**RVSF** सरकार से अधिकृत सुविधाएं हैं, जहां ELV को कानून के अनुसार खोला जाता है, मूल्यवान सामग्री निकाली जाती है और हानिकारक अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान किया जाता है। ये **MoRTH** के साथ पंजीकृत होती हैं। भारत देशभर में **450+ RVSF** स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। **CERO (मारुति सुज़ुकी)** और **MSTC** शुरुआती अग्रदूत हैं।
वाहन स्क्रैपेज भारत के इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव से कैसे जुड़ा है?
वाहन स्क्रैपेज और **EV बदलाव** गहराई से जुड़े हैं: (1) पुराने वाहनों को स्क्रैप करने से तुरंत **उत्सर्जन में कमी** आती है; (2) **स्क्रैपेज प्रमाणपत्र नए EV की खरीद पर छूट** देते हैं; (3) ELV EV से **बैटरी सामग्री की रिकवरी** (लिथियम, कोबाल्ट) जरूरी है; (4) **PM E-DRIVE योजना** EV अपनाने में तेजी लाने के लिए स्क्रैपेज प्रोत्साहन का उपयोग करती है। भारत **2030 तक 30% EV बाजार हिस्सेदारी** का लक्ष्य रखता है।