ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 11 फरवरी 2026 को भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 जारी किया, जिसमें भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है और उसे 100 में से 39 अंक मिले। यह पिछले वर्ष की 96वीं रैंक से मामूली सुधार है।

CPI विशेषज्ञ मूल्यांकन और व्यावसायिक सर्वेक्षणों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को मापता है — 0 का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट और 100 का अर्थ बहुत स्वच्छ है। 2025 सूचकांक में डेनमार्क (89), फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) शीर्ष पर रहे, जबकि दक्षिण सूडान (9), सोमालिया (9) और वेनेजुएला (10) सबसे निचले स्थान पर रहे। भारत का 39 का स्कोर वैश्विक औसत 43 से कम है और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को उन देशों में शामिल किया जहां भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को खतरा रहता है।

पिछले दशक में भारत का स्कोर 38-41 के बीच बना रहा है। रिपोर्ट में न्यायिक देरी, चुनावी वित्तपोषण में अपारदर्शिता और सेवा वितरण में नौकरशाही भ्रष्टाचार को प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया गया। डिजिटल सेवा वितरण (DBT), ई-प्रोक्योरमेंट और GST के औपचारीकरण को आंशिक सुधार के कारणों में माना गया।