मुख्य तथ्य

  • दहेज वधू पक्ष द्वारा वर पक्ष को दी जाने वाली संपत्ति या नकद है;
  • IPC धारा 498A (1983) पति या उसके परिजनों द्वारा पत्नी के साथ क्रूरता को अपराध बनाती है;
  • भारत में तलाक दर (~1.1/1,000 जनसंख्या) वैश्विक स्तर पर कम है पर बढ़ रही है;
  • भारत में भ्रष्टाचार से प्रतिवर्ष GDP का लगभग 5% नुकसान; ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल CPI 2023 में भारत 180 में 93वें स्थान पर (स्कोर 39/100);
  • गरीबी: नीति आयोग 2023 MPI रिपोर्ट — 11.28% भारतीय बहुआयामी गरीब (2013-14 में 29.17% से गिरावट); तेंदुलकर समिति (2009) कैलोरी-आधारित उपभोग;

मुख्य बिंदु

  1. 1

    दहेज वधू पक्ष द्वारा वर पक्ष को दी जाने वाली संपत्ति या नकद है; दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 देने-लेने पर 5 वर्ष कारावास एवं ₹15,000 या दहेज मूल्य (जो अधिक हो) के जुर्माने का प्रावधान करता है।

  2. 2

    IPC धारा 498A (1983) पति या उसके परिजनों द्वारा पत्नी के साथ क्रूरता को अपराध बनाती है; धारा 304B दहेज मृत्यु (विवाह के 7 वर्ष के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु) को परिभाषित करती है।

  3. 3

    भारत में तलाक दर (~1.1/1,000 जनसंख्या) वैश्विक स्तर पर कम है पर बढ़ रही है; हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 व्यभिचार, क्रूरता, परित्याग (2 वर्ष) के आधार देता है; तीन तलाक को 2019 के कानून से दंडनीय बनाया गया।

  4. 4

    भारत में भ्रष्टाचार से प्रतिवर्ष GDP का लगभग 5% नुकसान; ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल CPI 2023 में भारत 180 में 93वें स्थान पर (स्कोर 39/100); भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) प्रमुख कानून है।

  5. 5

    गरीबी: नीति आयोग 2023 MPI रिपोर्ट — 11.28% भारतीय बहुआयामी गरीब (2013-14 में 29.17% से गिरावट); तेंदुलकर समिति (2009) कैलोरी-आधारित उपभोग; वर्तमान आधिकारिक रेखा तेंदुलकर पद्धति पर।

  6. 6

    बेरोजगारी: PLFS 2022-23 में बेरोजगारी दर 3.2% (सामान्य स्थिति); शहरी युवा (15–29 वर्ष) बेरोजगारी 10%; संरचनात्मक, घर्षणात्मक, चक्रीय और प्रच्छन्न बेरोजगारी चार मुख्य प्रकार।

  7. 7

    मादक पदार्थ व्यसन: NDDTC 2019 सर्वेक्षण — 16 करोड़ लोग शराब का हानिकारक उपयोग; 3.1 करोड़ गांजा; 2.26 करोड़ अफीमयुक्त पदार्थ; पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर राज्यों में हेरोइन/अफीम उपयोग सर्वाधिक।

  8. 8

    वेश्यावृत्ति: ITPA 1956 (1986 संशोधित) स्वयं वेश्यावृत्ति को दंडनीय नहीं बनाता, पर वेश्यागृह, दलाली और सार्वजनिक याचना प्रतिबंधित है; NCRB 2022 में ITPA के तहत 2,189 मामले दर्ज।

  9. 9

    सामाजिक समस्याओं के कारण परस्पर जुड़े हैं: पितृसत्ता से दहेज एवं लैंगिक हिंसा; आर्थिक असमानता से गरीबी और वेश्यावृत्ति; राजनीतिक संरक्षण से भ्रष्टाचार; रोजगारविहीन शहरीकरण से बेरोजगारी; सामाजिक अलगाव से मादक पदार्थ व्यसन।

  10. 10

    भ्रष्टाचार विरोधी पहलें: RTI अधिनियम, 2005 (जवाबदेही); लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (स्वतंत्र लोकपाल); PFMS (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण); व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2014

  11. 11

    बेरोजगारी योजनाएँ: मनरेगा (100 दिन गारंटीड ग्रामीण रोजगार); PMKVY — युवाओं का कौशल प्रशिक्षण; स्टार्टअप इंडिया (2016); NCS पोर्टल; आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना

  12. 12

    NDPS अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थ दुरुपयोग का प्रमुख कानून है; मात्रा के अनुसार 6 माह से 20 वर्ष कारावास; नीति आयोग की नशा माँग न्यूनीकरण रणनीति (2021) रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित।

सामाजिक समस्याओं को समझने का सही तरीका क्या है?

सामाजिक समस्याओं को समझने का सही तरीका यह है कि उन्हें किसी व्यक्ति की अकेली कमजोरी नहीं, बल्कि समाज की संरचना, अर्थव्यवस्था, लैंगिक संबंधों और शासन की विफलताओं से जुड़ी सार्वजनिक समस्या माना जाए। RPSC के आधिकारिक मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में इस विषय के अंतर्गत 7 सामाजिक समस्याएँ दी गई हैं: दहेज, तलाक, भ्रष्टाचार, गरीबी, वेश्यावृत्ति, बेरोजगारी और नशा। जनगणना 2011 की वैवाहिक स्थिति तालिका सी-02 में भारत की कुल जनसंख्या 121.09 करोड़ दर्ज है; इतने बड़े समाज में सामाजिक समस्या को व्यक्ति की निजी गलती नहीं, सार्वजनिक नीति और संस्थागत सुधार के प्रश्न के रूप में पढ़ना चाहिए। इसलिए इस अध्याय में हर समस्या को परिभाषा, कारण, प्रभाव, कानून, नीति और उत्तर-लेखन के छोटे आँकड़े के साथ पढ़ना चाहिए।

एक सामाजिक समस्या ऐसी स्थिति है जो समाज के एक बड़े भाग को हानि पहुँचाती है और जिसे अधिकांश समुदाय सुधार योग्य मानता है। भारतीय संदर्भ में सामाजिक समस्याएँ आर्थिक अभाव, लैंगिक असमानता, जाति-आधारित पदानुक्रम और शासन की विफलताओं से अक्सर जुड़ जाती हैं।

RPSC 2026 पाठ्यक्रम में विषय 44 के अंतर्गत सात सामाजिक समस्याएँ स्पष्ट रूप से दी गई हैं: दहेज, तलाक, भ्रष्टाचार, गरीबी, वेश्यावृत्ति, बेरोजगारी और नशा। पूर्ववर्ती प्रश्नों के आँकड़े बताते हैं कि भ्रष्टाचार, गरीबी और दहेज सबसे अधिक पूछे गए उप-विषय रहे हैं: 2021 में राजनीतिक भ्रष्टाचार की परिभाषा पर 2 अंक, 2023 में दहेज प्रणाली के दोष पर 2 अंक, 2023 में गरीबी की संस्कृति पर 2 अंक और 2023 में आकस्मिक रोजगार पर 2 अंक।

समाजशास्त्रीय ढांचा: सी. राइट मिल्स ने 1959 में व्यक्तिगत कठिनाइयों और सार्वजनिक मुद्दों में अंतर किया। बेरोजगारी जैसी समस्या किसी व्यक्ति की निजी विफलता लग सकती है, पर वह अक्सर अर्थव्यवस्था में पर्याप्त रोजगार न होने जैसी संरचनात्मक समस्या होती है। RPSC परीक्षक सामाजिक समस्याओं पर प्रश्न बनाते समय इसी मिल्सीय दृष्टि का उपयोग करते हैं।

अंतर्संबंध: ये समस्याएँ प्रायः अलग-थलग नहीं रहतीं। गरीबी परिवारों को वित्तीय सुरक्षा के रूप में दहेज मांगने की ओर धकेलती है; बेरोजगारी व्यक्ति को जीविका रणनीति के रूप में नशे या वेश्यावृत्ति की ओर ले जा सकती है; भ्रष्टाचार गरीबी घटाने वाले कल्याण कोष को मोड़ देता है; और आर्थिक तनाव तथा बदलते लैंगिक मानदंडों के साथ तलाक की दर बढ़ती है।

परीक्षा-उपयोग: इस विषय में उत्तर का अच्छा ढाँचा छोटा और ठोस होना चाहिए: पहले परिभाषा, फिर दो-तीन कारण, फिर कानून या योजना, फिर एक आधिकारिक आँकड़ा और अंत में सुधार की दिशा। दहेज, भ्रष्टाचार और गरीबी पर प्रश्नों में कानून और आँकड़ा दोनों जरूरी हैं; तलाक और वेश्यावृत्ति पर उत्तर में नैतिक उपदेश से अधिक कानूनी स्थिति और सामाजिक कारणों की साफ समझ जरूरी है।

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संभावित प्रश्न

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15Mदहेज प्रथा के मुख्य दोष क्या हैं? इसके विरुद्ध कानूनी प्रावधान बताइए।5 अंक · 50 शब्द

मॉडल उत्तर

दहेज के दोष: (1) कन्या भ्रूण हत्या; (2) दहेज मृत्यु — 6,450 (NCRB 2022); (3) घरेलू हिंसा; (4) वधू परिवार पर ऋण। कानूनी सुरक्षा: दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 (5 वर्ष कारावास); IPC 498A (क्रूरता); IPC 304B (दहेज मृत्यु — न्यूनतम 7 वर्ष)।

~50 शब्द · 5 अंक