प्रकाशित: 30 जनवरी 2026PIB / PM India / DD Newsपर्यावरण
भारत ने दो नए रामसर आर्द्रभूमि स्थल शामिल किए; विश्व आर्द्रभूमि दिवस से पहले कुल संख्या 98 हुई
31 जनवरी 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस (2 फरवरी) से पहले दो नए आर्द्रभूमि स्थलों को भारत की रामसर सूची में शामिल करने की घोषणा की — उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड। इससे भारत में रामसर सूची में शामिल आर्द्रभूमियों की कुल संख्या 98 हो गई, जो 2014 के बाद 276% की वृद्धि दर्शाती है।
पटना पक्षी अभयारण्य, उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है। यह एक वर्ग किलोमीटर से थोड़ा अधिक क्षेत्र में फैला है और शीत ऋतु में 60,000 से अधिक प्रवासी पक्षियों का आवास बनता है। छारी-ढांड कच्छ में खारे पानी वाली मौसमी रेगिस्तानी आर्द्रभूमि है, जो अच्छे मानसून में 80 वर्ग किलोमीटर तक फैल जाती है। यहां चिंकारा, भेड़िया, काराकल, रेगिस्तानी लोमड़ी और कई संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · प्रारंभिकस्रोतPIB / PM India / DD News
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नआसान
विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रतिवर्ष किस तारीख को मनाया जाता है?
व्याख्या · सही उत्तर Bविश्व आर्द्रभूमि दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है, जो 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन के हस्ताक्षर का स्मरण करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
31 जनवरी 2026 को भारत की रामसर सूची में कौन से दो स्थल जोड़े गए और वे किन राज्यों में हैं?
31 जनवरी 2026 को पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) और छारी-ढांड (गुजरात) भारत की रामसर आर्द्रभूमि स्थलों की सूची में जोड़े गए। इससे भारत के रामसर स्थलों की कुल संख्या 98 हो गई।
रामसर कन्वेंशन क्या है और यह भारत पर कौन से दायित्व लागू करता है?
रामसर कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिस पर 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर हुए और जो विश्वभर में आर्द्रभूमि संरक्षण का ढाँचा प्रदान करती है। नामांकन भारत को सूचीबद्ध स्थलों के पारिस्थितिक चरित्र को बनाए रखने और राष्ट्रीय नीति में आर्द्रभूमि संरक्षण को एकीकृत करने के लिए बाध्य करता है।
2014 के बाद से भारत के रामसर स्थलों की संख्या में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई और यह क्या दर्शाता है?
2014 के बाद से भारत की रामसर सूची में 276% की वृद्धि हुई — 26 स्थलों से बढ़कर जनवरी 2026 तक 98 स्थल हो गए। यह तेज वृद्धि आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता और पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता देने को दर्शाती है।
रामसर ढाँचे के अनुसार आर्द्रभूमियाँ पारिस्थितिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, कार्बन अवशोषण और जल शुद्धिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रामसर ढाँचा आर्द्रभूमियों को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के पारिस्थितिक तंत्र के रूप में मान्यता देता है।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस का महत्व क्या है और 2026 में यह कब मनाया गया?
विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रतिवर्ष 2 फरवरी को आर्द्रभूमि के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। 31 जनवरी 2026 को दो नए रामसर स्थलों की घोषणा विश्व आर्द्रभूमि दिवस से ठीक पहले की गई, जो संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।