भारत के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) ने 27 जनवरी 2026 को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का प्रकोप नियंत्रण में आ गया है। बारासात के निजी अस्पताल के दो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अलावा दिसंबर 2025 से कोई नया पुष्ट मामला नहीं मिला। सभी 190+ संपर्कों की जांच रिपोर्ट नकारात्मक रही। निगरानी बढ़ाई गई है और संक्रमण रोकथाम के उपाय जारी हैं। ECDC ने यूरोपीय नागरिकों के लिए जोखिम बहुत कम आंका। पिछले निपाह प्रकोपों (केरल 2018, 2019, 2021, 2023) का अनुभव तेज नियंत्रण में उपयोगी रहा। निपाह वायरस की मृत्यु दर 40-75% है और कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार नहीं है।
निपाह वायरस प्रकोप नियंत्रित: NCDC ने पश्चिम बंगाल में कोई नया मामला नहीं होने की पुष्टि की
NCDC ने निपाह प्रकोप नियंत्रित होने की पुष्टि की; 2 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अलावा कोई नया मामला नहीं; मृत्यु दर 40-75%।
मुख्य तथ्य
- NCDC ने 27 जनवरी 2026 को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का प्रकोप नियंत्रण में है।
- दिसंबर 2025 से कोई नया पुष्ट मामला नहीं आया; उत्तर 24 परगना के बारासात के एक निजी अस्पताल में केवल दो स्वास्थ्यकर्मी ही पुष्ट मामले थे।
- 190 से अधिक पहचाने गए संपर्कों की जांच नकारात्मक रही; सघन निगरानी और IPC उपाय जारी हैं।
- ECDC ने यूरोपीय लोगों के लिए जोखिम बहुत कम आंका।
- केरल (2018, 2019, 2021, 2023) में निपाह के पिछले प्रकोपों के अनुभव ने त्वरित नियंत्रण में मदद की।
- निपाह वायरस की मृत्यु दर 40-75% है और इसके लिए कोई अनुमोदित टीका या विशिष्ट उपचार नहीं है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: पश्चिम बंगाल 2025-26 निपाह प्रकोप नियंत्रण तथा भविष्य की ज़ूनोटिक रोग तैयारी के लिए सबक का आकलन करें।
उत्तर (50 शब्द):
27 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने उत्तर 24 परगना के बारासात अस्पताल में निपाह प्रकोप के नियंत्रण की पुष्टि की। दिसंबर 2025 से दो स्वास्थ्यकर्मियों से आगे मामला नहीं बढ़ा। 190 से अधिक संपर्कों की जांच नकारात्मक रही। केरल 2018-2023 के अनुभव से तेज निगरानी संभव हुई। निपाह की मृत्युदर 40-75 प्रतिशत है और कोई स्वीकृत टीका नहीं है।
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2026 की शुरुआत में भारत में निपाह वायरस के प्रकोप के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पश्चिम बंगाल से प्रयोगशाला में पुष्ट दो मामले सामने आए। 2. दोनों रोगी बारासात, उत्तर 24 परगना के एक अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी थे। 3. पुष्टि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे द्वारा की गई। 4. WHO ने समग्र जोखिम को उच्च आंका। उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि WHO ने जोखिम को 'मध्यम' आंका, उच्च नहीं। बारासात, उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के एक निजी अस्पताल में 20-30 वर्ष की आयु के दो स्वास्थ्यकर्मियों की पुष्टि NIV पुणे द्वारा की गई। 190 से अधिक संपर्कों की पहचान की गई और सभी का परीक्षण नकारात्मक रहा। NCDC ने पुष्टि की कि प्रकोप को रोक दिया गया।
स्रोत: Al Jazeera
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का प्रकोप क्या था और इसे कैसे नियंत्रित किया गया?
**NCDC (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र)** ने पुष्टि की कि **पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का कोई नया मामला नहीं** है। इससे प्रकोप पर सफल नियंत्रण का संकेत मिला। निपाह एक **जूनोटिक पैरामाइक्सोवायरस** है, जिसकी **40-75% मृत्यु दर** है। नियंत्रण के उपायों में **संपर्कों की पहचान और निगरानी**, **अलगाव और सहायक उपचार**, **फलाहारी चमगादड़ों की निगरानी** और **लोगों के लिए सलाह** शामिल थे।
निपाह वायरस क्या है और यह मनुष्यों में कैसे फैलता है?
**निपाह वायरस (NiV)** पहली बार **1999 में मलेशिया** में पहचाना गया। यह फैलता है: (1) **संक्रमित फलों के चमगादड़** (Pteropus प्रजाति — प्राकृतिक भंडार) के सीधे संपर्क से; (2) **खजूर के कच्चे रस** के सेवन से, जब वह चमगादड़ के मूत्र/लार से दूषित हो; (3) **संक्रमित मनुष्यों या जानवरों (सूअर)** के निकट संपर्क से। **कोई स्वीकृत टीका नहीं** — केवल **सहायक देखभाल**। भारत में केरल और पश्चिम बंगाल में प्रकोप हुए हैं।
भारत में संक्रामक रोग निगरानी में NCDC की क्या भूमिका है?
**NCDC** **स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय** के तहत भारत की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था है, जो रोग निगरानी और प्रकोपों से निपटने का काम करती है। कार्य: (1) **राष्ट्रीय निगरानी नेटवर्क** — IDSP; (2) **प्रयोगशाला सहायता** — BS स्तर-3 और 4; (3) **प्रकोप जांच** — रैपिड रिस्पॉन्स टीम; और (4) **WHO** के साथ समन्वय।
निपाह प्रकोपों में केरल का अनुभव और भारत की तैयारी क्या है?
**केरल** में **निपाह के कई प्रकोप** हुए हैं: 2018 (कोझिकोड, 17 मौतें), 2019 (1 मामला), 2021 (1 मामला), और 2023 (6 पुष्ट मामले)। केरल की प्रतिक्रिया **प्रकोप प्रबंधन का मॉडल** बन गई है: त्वरित संपर्क ट्रेसिंग, अस्पताल संक्रमण नियंत्रण। 2018 में ऑस्ट्रेलिया से **mAb थेरेपी** आयात की गई। ICMR ने **निपाह टीका परीक्षण** में तेजी लाई है।
निपाह के अलावा भारत में चिंता की अन्य जूनोटिक बीमारियाँ कौन सी हैं?
भारत के सामने कई **जूनोटिक रोगों के खतरे** हैं: (1) **H5N1 एवियन इन्फ्लुएंजा** — पक्षी फ्लू; (2) **क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD)** — टिक-जनित, पश्चिमी घाट; (3) **CCHF** — टिक-जनित, गुजरात-राजस्थान; (4) **मंकीपॉक्स**। भारत का **वन हेल्थ** ढांचा **NAPHS** के तहत पशु-मानव-पर्यावरण के आपसी संबंधों की निगरानी से इन खतरों पर नजर रखता है।
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