भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिकों का एक अध्ययन समीक्षित पत्रिका 'करेंट साइंस' में प्रकाशित हुआ, जिसे 13 मार्च 2026 को प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया। यह अध्ययन भारत के दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWR) के लिए उच्च आश्वासन अल्प समृद्ध यूरेनियम-थोरियम (HALEU-Th) ईंधन की उपयुक्तता पर सवाल उठाता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि बड़े संरचनात्मक बदलावों के बिना HALEU-Th का भारत के मौजूदा रिएक्टरों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

HALEU-Th ईंधन 5–20% तक समृद्ध यूरेनियम और थोरियम का मिश्रण है। अमेरिकी कंपनी CCTE इसे 'ANEEL' नाम से बेचती है। इसके समर्थकों का दावा है कि इससे 50–60 GWd/t ऊर्जा मिलती है और परंपरागत ईंधन की तुलना में सिर्फ़ 14% रेडियोधर्मी कचरा पैदा होता है। BARC के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ईंधन सुरक्षा शटडाउन छड़ों की प्रभावशीलता को 26% तक घटा सकता है।

भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना डॉ. होमी भाभा ने की थी। इसमें प्राकृतिक यूरेनियम PHWR (चरण 1), प्लूटोनियम तेज़ ब्रीडर रिएक्टर (चरण 2) और थोरियम-आधारित रिएक्टर (चरण 3) शामिल हैं। BARC की चिंता यह है कि HALEU-Th को समय से पहले अपनाने से भारत का तय परमाणु रोडमैप बाधित हो सकता है। राजस्थान में रावतभाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (RAPS) और माही बांसवाड़ा परियोजना हैं।