प्रकाशित: 12 मार्च 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
BARC के अध्ययन ने भारत के PHWR रिएक्टरों के लिए HALEU-थोरियम ईंधन की उपयुक्तता पर सवाल उठाए; परमाणु वैज्ञानिकों में मतभेद
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिकों का एक अध्ययन समीक्षित पत्रिका 'करेंट साइंस' में प्रकाशित हुआ, जिसे 13 मार्च 2026 को प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया। यह अध्ययन भारत के दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWR) के लिए उच्च आश्वासन अल्प समृद्ध यूरेनियम-थोरियम (HALEU-Th) ईंधन की उपयुक्तता पर सवाल उठाता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि बड़े संरचनात्मक बदलावों के बिना HALEU-Th का भारत के मौजूदा रिएक्टरों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
HALEU-Th ईंधन 5–20% तक समृद्ध यूरेनियम और थोरियम का मिश्रण है। अमेरिकी कंपनी CCTE इसे 'ANEEL' नाम से बेचती है। इसके समर्थकों का दावा है कि इससे 50–60 GWd/t ऊर्जा मिलती है और परंपरागत ईंधन की तुलना में सिर्फ़ 14% रेडियोधर्मी कचरा पैदा होता है। BARC के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ईंधन सुरक्षा शटडाउन छड़ों की प्रभावशीलता को 26% तक घटा सकता है।
भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना डॉ. होमी भाभा ने की थी। इसमें प्राकृतिक यूरेनियम PHWR (चरण 1), प्लूटोनियम तेज़ ब्रीडर रिएक्टर (चरण 2) और थोरियम-आधारित रिएक्टर (चरण 3) शामिल हैं। BARC की चिंता यह है कि HALEU-Th को समय से पहले अपनाने से भारत का तय परमाणु रोडमैप बाधित हो सकता है। राजस्थान में रावतभाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (RAPS) और माही बांसवाड़ा परियोजना हैं।
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राजस्थान के किन स्थानों पर एचएएलईयू-थोरियम ईंधन पर बीएआरसी अध्ययन से संबंधित भारत के प्रमुख परमाणु संयंत्र हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Dराजस्थान में परमाणु ऊर्जा के दो महत्त्वपूर्ण केंद्र हैं: रावतभाटा परमाणु विद्युत स्टेशन, जिसे रैप्स कहा जाता है, और माही बांसवाड़ा परमाणु परियोजना। इसलिए राज्य के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा नीति सीधे जुड़ती है। करंट साइंस में प्रकाशित बीएआरसी अध्ययन भारत के पीएचडब्ल्यूआर रिएक्टरों में एचएएलईयू-थोरियम ईंधन की उपयुक्तता पर प्रश्न उठाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
BARC अध्ययन ने भारत के PHWRs में HALEU-थोरियम (ANEEL) ईंधन के उपयोग के बारे में क्या निष्कर्ष निकाला?
BARC अध्ययन, जिसकी रिपोर्ट 13 मार्च 2026 को आई, ने निष्कर्ष निकाला कि HALEU-थोरियम (ANEEL) ईंधन बिना बड़े संरचनात्मक बदलावों के भारत के दबावयुक्त भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) में उपयोग नहीं हो सकता। इसमें चेतावनी दी गई कि यह ईंधन शटडाउन रॉड की सुरक्षा प्रभावशीलता को लगभग 26% तक कम कर देगा।
ANEEL ईंधन क्या है और इसे किसका समर्थन मिल रहा है?
ANEEL का पूरा नाम Advanced Nuclear Energy for Enriched Life है। यह अमेरिका-समर्थित ईंधन की अवधारणा है, जिसमें उच्च-संवर्धित निम्न-समृद्ध यूरेनियम (HALEU) को थोरियम के साथ मिलाया जाता है और इसे नागरिक परमाणु सहयोग के तहत भारत के मौजूदा रिएक्टरों में उपयोग के लिए प्रस्तावित किया गया है।
HALEU-थोरियम ईंधन अपनाने से भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
HALEU-थोरियम ईंधन अपनाने से भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम बाधित होगा, जो परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 पर आधारित प्राकृतिक यूरेनियम → प्लूटोनियम → थोरियम चक्र पर चलता है।
वैश्विक थोरियम भंडार में भारत की स्थिति क्या है और ये भंडार कहाँ स्थित हैं?
भारत के पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा थोरियम भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 25% है। ये भंडार मुख्यतः केरल और राजस्थान में मोनाजाइट रेत के रूप में पाए जाते हैं।
दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) क्या है और यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) में भारी जल मॉडरेटर और शीतलक के रूप में इस्तेमाल होता है और यह प्राकृतिक यूरेनियम से चलता है। PHWR भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के प्रथम चरण की रीढ़ हैं और इनका डिज़ाइन व संचालन स्वदेशी है।