खान मंत्रालय ने 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर उच्च-स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। बैठक में सरकार, उद्योग, अकादमिक जगत और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भाग लिया और भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

मुख्य संबोधन में खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल ने भारत की महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला को गति देने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुधारों, कारोबार सुगमता और लक्षित प्रोत्साहनों के सहारे लचीली और आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत के ऊर्जा संक्रमण, आर्थिक वृद्धि और तकनीकी उन्नति के केंद्र में हैं, इसलिए अन्वेषण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में तेजी से काम करना जरूरी है।

कार्यशाला में खान अपशिष्ट, टेलिंग, स्लैग और औद्योगिक अवशेषों को महत्वपूर्ण खनिजों के व्यवहार्य और लागत-प्रभावी स्रोत के रूप में रेखांकित किया गया। शहरी खनन पर भी जोर दिया गया, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के पुनर्चक्रण पर, जिसे सरकार के प्रोत्साहन ढांचे से समर्थन मिल रहा है।

तकनीकी सत्रों में द्वितीयक स्रोतों से पुनर्प्राप्ति, उभरती प्रौद्योगिकियां, पायलट परियोजनाएं, पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र, तथा क्षेत्र को बढ़ाने के लिए जरूरी नीतिगत और तकनीकी कमियों पर चर्चा हुई। भारतीय कंपनियों और विश्व बैंक सहित वैश्विक संस्थानों के विशेषज्ञों ने तकनीकी तैयारी, वाणिज्यिक व्यवहार्यता और नीतिगत सहायक उपायों पर चर्चा की। चर्चाओं में प्रयोगशाला के नवाचारों को बड़े पैमाने के औद्योगिक समाधानों में बदलने और निजी निवेश आकर्षित करने के लिए नीति ढांचों के उपयोग पर जोर दिया गया। कार्यशाला सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के निकट समन्वय से पायलट परियोजनाओं में तेजी लाने और सिद्ध प्रौद्योगिकियों का विस्तार करने की सहमति के साथ समाप्त हुई।