खनिज
मुख्य तथ्य
- प्रायद्वीपीय कठोर चट्टानों में भारत के अधिकतर धात्विक खनिज मिलते हैं, जबकि जलोढ़ मैदान आर्थिक खनिजों में अपेक्षाकृत कमजोर हैं।
- छोटानागपुर खनिज पट्टी में कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट और मैंगनीज एक साथ जुड़े हैं।
- दामोदर के कोयला क्षेत्र, ओडिशा की क्योंझर-बोनाई लौह अयस्क पट्टी और राजस्थान के अरावली खनिज अलग आधारों पर पढ़े जाते हैं।
- ओडिशा का बॉक्साइट लेटराइट पठारों से जुड़ता है; कोडरमा-गया-हजारीबाग और राजस्थान अभ्रक के प्रश्नों को स्पष्ट करते हैं।
- मुंबई हाई, डिगबोई और बाड़मेर बताते हैं कि पेट्रोलियम अवसादी बेसिनों से जुड़ता है, प्राचीन शील्ड चट्टानों से नहीं।
मुख्य बिंदु
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प्रायद्वीपीय कठोर चट्टानों में भारत के अधिकतर धात्विक खनिज मिलते हैं, जबकि जलोढ़ मैदान आर्थिक खनिजों में अपेक्षाकृत कमजोर हैं।
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छोटानागपुर खनिज पट्टी में कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट और मैंगनीज एक साथ जुड़े हैं।
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दामोदर के कोयला क्षेत्र, ओडिशा की क्योंझर-बोनाई लौह अयस्क पट्टी और राजस्थान के अरावली खनिज अलग आधारों पर पढ़े जाते हैं।
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ओडिशा का बॉक्साइट लेटराइट पठारों से जुड़ता है; कोडरमा-गया-हजारीबाग और राजस्थान अभ्रक के प्रश्नों को स्पष्ट करते हैं।
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मुंबई हाई, डिगबोई और बाड़मेर बताते हैं कि पेट्रोलियम अवसादी बेसिनों से जुड़ता है, प्राचीन शील्ड चट्टानों से नहीं।
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राजस्थान में जावर और रामपुरा आगूचा के अलग-अलग सीसा-जस्ता क्षेत्र तथा झामरकोटड़ा का रॉक फॉस्फेट राष्ट्रीय स्तर की तुलना के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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भारत में खनिज प्रदेश प्रायद्वीपीय आधार से क्यों जुड़े हैं?
भारत में खनिज प्रदेश इसलिए प्रायद्वीपीय आधार से जुड़े हैं क्योंकि पुराने कठोर पठारी खंडों की क्रिस्टलीय, रूपांतरित और ज्वालामुखीय चट्टानों में धात्विक और कई अधात्विक खनिज लंबे भूवैज्ञानिक समय में केंद्रित हुए हैं। भारतीय खान ब्यूरो की भारतीय खनिज वर्षपुस्तक 2023 के अनुसार 2022-23 में खनिज संरक्षण और विकास नियमों के तहत आने वाले भारत के खनिज उत्पादन का मूल्य ₹1,96,591 करोड़ था। भारत का खनिज भूगोल चट्टान की आयु और संरचना से शुरू होता है।
मूल भू-आधार
- पुराने प्रायद्वीपीय खंडों में अधिकतर धात्विक खनिज इसलिए मिलते हैं क्योंकि क्रिस्टलीय, रूपांतरित और ज्वालामुखीय चट्टानें लंबे समय तक दरार, अंतःक्षेप और अपक्षय से गुजरी हैं।
- छोटानागपुर खनिज पट्टी इसका सबसे सघन उदाहरण है।
- इस क्षेत्र में कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट और मैंगनीज के भंडार पास-पास मिलते हैं।
- इसलिए पूर्वी भारत में कोयला क्षेत्र, लौह-इस्पात संयंत्र और भारी उद्योग साथ दिखाई देते हैं, जबकि गंगा का जलोढ़ मैदान आर्थिक खनिजों में कमजोर है।
राजस्थान की पश्चिमी तुलना
| क्षेत्र/पट्टी | स्थान/भूभाग | प्रमुख खनिज | संकेत |
|---|---|---|---|
| छोटानागपुर खनिज पट्टी | छोटानागपुर पठार, ओडिशा पठार, पश्चिम बंगाल और आसपास का झारखंड-छत्तीसगढ़ क्षेत्र | कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट और मैंगनीज | कोयला-लौह-अभ्रक की सघनता |
| राजस्थान के खनिज क्षेत्र | अरावली का कठोर चट्टानी भाग और पश्चिमी अवसादी बेसिन | अरावली क्षेत्र में सीसा-जस्ता, तांबा व रॉक फॉस्फेट; पश्चिमी बेसिनों में चूना पत्थर, जिप्सम व पोटाश | उदयपुर-भीलवाड़ा और नागौर-जैसलमेर अलग भूवैज्ञानिक परिवेश हैं |
| जावर और रामपुरा आगूचा के अलग-अलग सीसा-जस्ता खनन क्षेत्र | राजस्थान के अरावली भूभाग में | सीसा-जस्ता | छोटानागपुर से तुलना के लिए उपयोगी अलग खनन क्षेत्र |
| झामरकोटड़ा रॉक फॉस्फेट निक्षेप | राजस्थान के अरावली भूभाग में | रॉक फॉस्फेट | उर्वरक खनिज का उदाहरण |
- यहाँ मूल भेद पूर्व-पश्चिम नहीं, बल्कि पुरानी कठोर चट्टान और युवा जलोढ़ आवरण का है।
- इसलिए छोटानागपुर खनिज पट्टी की तुलना जावर और रामपुरा आगूचा के अलग-अलग सीसा-जस्ता खनन क्षेत्रों तथा झामरकोटड़ा रॉक फॉस्फेट निक्षेप से करनी चाहिए।
- पहली पट्टी कोयला-लौह-अभ्रक की सघनता दिखाती है, दूसरी राजस्थान के अरावली भूभाग में अलौह और उर्वरक खनिज दिखाती है।
खनिज मानचित्र में पट्टियों का अर्थ
- खनिज मानचित्र बिंदु नहीं, पट्टियाँ दिखाते हैं क्योंकि पट्टी अयस्क, चट्टान, परिवहन, ऊर्जा और उपभोक्ता उद्योग को जोड़ती है।
- भारी अयस्क दूर ले जाना महँगा होता है।
- इसलिए रेलमार्ग, बिजलीघर, धुलाई संयंत्र, गलाने की इकाइयाँ और सीमेंट कारखाने अयस्क निकाय या बाजार के रास्ते के पास बढ़ते हैं।
- पूर्वी भारत में दामोदर-छोटानागपुर इस्पात क्षेत्र और राजस्थान में खदान से सीमेंट कारखाने तक फैले जिले इसके साफ उदाहरण हैं।
- खनिज पट्टियों के पास रेल लाइनें, बिजलीघर, कोयला धुलाई संयंत्र, गलाने की इकाइयाँ और सीमेंट कारखाने विकसित होते हैं।
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1MCQएक खनिज पट्टी झारखंड, ओडिशा पठार और पश्चिम बंगाल में कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट और मैंगनीज को साथ रखती है। कौन-सा विकल्प सही है?
व्याख्या
क सही है क्योंकि विवरण कई खनिजों वाली पूर्वी पठारी पट्टी बताता है, कोई एक-खनिज पट्टी नहीं। ख केवल अभ्रक से, ग लेटराइट बॉक्साइट से और घ राजस्थान के सीसा-जस्ता से जुड़ा है।
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