वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने 15 अप्रैल 2026 को मार्च 2026 के लिए भारत के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आँकड़े जारी किए। इसका आधार वर्ष 2011-12 है। मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 में डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 3.88 प्रतिशत (अनंतिम) रही। फरवरी 2026 में यह 2.13 प्रतिशत थी, इसलिए मार्च में इसमें तेज़ बढ़ोतरी दर्ज हुई। फरवरी 2026 की तुलना में मार्च 2026 के डब्ल्यूपीआई में 1.64 प्रतिशत का मासिक बदलाव आया। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, मूल धातुओं के विनिर्माण और खाद्य वस्तुओं की ऊँची कीमतें थीं। विनिर्माण उप-समूह में विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक 0.88 प्रतिशत बढ़ा और राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी) के 22 दो-अंकीय समूहों में से 16 में कीमतें बढ़ीं। डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक की सालाना मुद्रास्फीति दर 1.85 प्रतिशत पर स्थिर रही। इससे पता चलता है कि कुल मुद्रास्फीति का मुख्य दबाव खाद्य वस्तुओं के बजाय ईंधन और औद्योगिक सामग्री से आया। मार्च 2026 का अनंतिम डब्ल्यूपीआई 77.8 प्रतिशत की भारित प्रतिक्रिया दर के आधार पर तैयार किया गया, जबकि जनवरी 2026 के अंतिम आँकड़े 92.7 प्रतिशत की प्रतिक्रिया दर पर आधारित थे। डब्ल्यूपीआई, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का पूरक है। नीति-निर्माता, उद्योग जगत और भारतीय रिज़र्व बैंक थोक कीमतों के दबाव का आकलन करने के लिए इसका व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। अप्रैल 2026 की डब्ल्यूपीआई विज्ञप्ति 14 मई 2026 को जारी हुई; मई 2026 की अगली विज्ञप्ति 15 जून 2026 को जारी होनी है।