नीति आयोग का अध्ययन 'समावेशी सामाजिक विकास के लिए AI' भारत के 49 करोड़ असंगठित कामगारों को केंद्र में रखता है, जो बड़े पैमाने पर डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर हैं। इसी संदर्भ में मिशन डिजिटल श्रमसेतु का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। यह 2025 से 2030 और उसके आगे तक फैली 20-वर्षीय राष्ट्रीय पहल है, जिसका लक्ष्य कामगारों का डिजिटल सशक्तीकरण है।

इस रोडमैप में AI को केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि श्रम और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े शासन के औजार के रूप में देखा गया है। कौशल मूल्यांकन, रोजगार मिलान, सामाजिक सुरक्षा पोर्टेबिलिटी और वित्तीय समावेश इसके मुख्य उपयोग बताए गए हैं। असंगठित क्षेत्र को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से कामगारों की कौशल पहचान, रोजगार से जुड़ाव, लाभों की पोर्टेबिलिटी और वित्तीय पहुंच जैसे मुद्दों पर नीति बनती है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए 49 करोड़ कामगार, 20-वर्षीय मिशन डिजिटल श्रमसेतु और AI के प्रस्तावित उपयोग सीधे याद रखने योग्य तथ्य हैं। RAS और UPSC जैसे पेपरों में इससे डिजिटल समावेशन, असंगठित श्रम, वित्तीय समावेश और सामाजिक सुरक्षा जैसे बिंदु पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग इस बात पर चर्चा के लिए किया जा सकता है कि तकनीक असंगठित कामगारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे गलत या असमान ढंग से लागू करने से डिजिटल विभाजन और बढ़ सकता है। इसलिए AI को जिम्मेदार और न्यायसंगत ढंग से लागू करना इस रोडमैप का केंद्रीय संदेश है।