विश्व आवास दिवस 2025 वैश्विक स्तर पर 6 अक्टूबर — अक्टूबर के पहले सोमवार — को 'शहरी संकट प्रतिक्रिया' विषय के साथ मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित यह दिन शहरों और कस्बों की स्थिति तथा पर्याप्त आश्रय के अधिकार पर ध्यान केंद्रित करता है। भारत के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है — भारतीय शहरों में 36% आबादी रहती है, वे GDP में 60% से अधिक योगदान देते हैं, और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएमएवाई-यू के तहत 112.24 लाख घरों की आंकी गई मांग बताई है।
विश्व आवास दिवस 2025 'शहरी संकट प्रतिक्रिया' विषय पर 6 अक्टूबर को मनाया गया
विश्व आवास दिवस 2025 वैश्विक स्तर पर 6 अक्टूबर — अक्टूबर के पहले सोमवार — को 'शहरी संकट प्रतिक्रिया' विषय पर मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित यह दिन शहरों और कस्बों की स्थिति तथा पर्याप्त आश्रय के अधिकार पर ध्यान केंद्रित करता है। भारत के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है — भारतीय शहरों में 36% आबादी रहती है, वे GDP में 60% से अधिक योगदान देते हैं, और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएमएवाई-यू के तहत 112.24 लाख घरों की आंकी गई मांग बताई है।
मुख्य तथ्य
- विश्व आवास दिवस 2025 'शहरी संकट प्रतिक्रिया' विषय पर 6 अक्टूबर को मनाया गया।
- संयुक्त राष्ट्र प्रतिवर्ष अक्टूबर के पहले सोमवार को विश्व आवास दिवस के रूप में मनाता है।
- भारतीय शहरों में 36% आबादी रहती है और वे GDP में 60% से अधिक योगदान देते हैं।
- MoHUA के अनुसार भारत में 1.88 करोड़ शहरी आवास इकाइयों की कमी है।
- यह दिवस शहरों की स्थिति और पर्याप्त आश्रय के अधिकार पर ध्यान केंद्रित करता है।
- भारत में तेज शहरीकरण के लिए बेहतर शहरी आवास और अवसंरचना नियोजन की आवश्यकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व आवास दिवस कब मनाया जाता है और 2025 का विषय क्या था?
विश्व आवास दिवस प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है। 2025 में यह 6 अक्टूबर को पड़ा और विषय 'शहरी संकट प्रतिक्रिया' था।
MoHUA के अनुसार भारत में शहरी आवास की कमी कितनी है?
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के अनुसार, भारत में शहरी आवास की कमी 1.88 करोड़ (188 लाख) इकाइयों की है। यह कमी तेज शहरी जनसंख्या वृद्धि और उपलब्ध आवास के बीच की खाई को दर्शाती है।
भारतीय शहरों की जनसंख्या हिस्सेदारी और आर्थिक योगदान क्या है?
भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 36% हिस्सा शहरों में रहता है और ये शहर GDP में 60% से अधिक का योगदान देते हैं। यह शहरी क्षेत्रों को आवास और अवसंरचना चुनौतियों के बावजूद आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित विश्व आवास दिवस का उद्देश्य क्या है?
विश्व आवास दिवस वैश्विक स्तर पर शहरों और कस्बों की स्थिति तथा सभी लोगों के पर्याप्त आश्रय के मौलिक अधिकार पर ध्यान केंद्रित करता है। यह मानव आवास के भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी पर विचार-मंथन का अवसर भी देता है।
'शहरी संकट प्रतिक्रिया' विषय भारत के लिए 2025 में विशेष रूप से प्रासंगिक क्यों है?
यह विषय भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि तेज शहरीकरण के कारण 1.88 करोड़ आवास इकाइयों की कमी पैदा हुई है, जबकि 36% आबादी पहले से ही शहरों में रहती है। इस संकट से निपटने के लिए बेहतर शहरी नियोजन, अवसंरचना में निवेश और आवास नीति आवश्यक है।
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