प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1 लाख करोड़ की कुल केंद्रीय सहायता के साथ शहरी चुनौती निधि (UCF) शुरू करने को मंजूरी दी, जो FY 2025–26 से FY 2030–31 तक चलेगी और जिसे FY 2033–34 तक बढ़ाया जा सकेगा। UCF भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव दिखाता है: अनुदान आधारित वित्तपोषण से हटकर बाजार से जुड़े, सुधारों पर आधारित और परिणाम पर केंद्रित अवसंरचना निर्माण की ओर।

मुख्य विशेषताएं: केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का 25% हिस्सा देगी, जबकि न्यूनतम 50% राशि बाजार स्रोतों से जुटानी होगी। इस व्यवस्था से पांच वर्षों में ₹4 लाख करोड़ के कुल शहरी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रमुख क्षेत्रों में 'विकास केंद्र के रूप में शहर' (एकीकृत स्थानिक और आर्थिक योजना, ट्रांजिट से जुड़ा विकास) और 'शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास' (केंद्रीय व्यापारिक जिले का नवीनीकरण, विरासत क्षेत्रों का पुनर्जीवन, ब्राउनफील्ड पुनर्विकास) शामिल हैं।

पात्रता: 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले सभी शहर (2025 अनुमान), सभी राज्य व UT राजधानियां और 1 लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख औद्योगिक शहर पात्र हैं। ₹5,000 करोड़ की अलग ऋण पुनर्भुगतान गारंटी योजना में पहली बार नगर पालिका बॉन्ड जारी करने वालों के लिए ₹7 करोड़ या ऋण राशि के 70% (जो भी कम हो) तक की केंद्रीय गारंटी शामिल है।

राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर जैसे शहर इस निधि के लिए पात्र होने की उम्मीद है।