प्रसिद्ध भारतीय पारिस्थितिकीविद् प्रो. माधव गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 'आधुनिक भारतीय पारिस्थितिकी के पिता' के रूप में व्यापक सम्मान मिला। छह दशकों की विद्वत्ता और सार्वजनिक सेवा में गाडगिल ने संरक्षण जीवविज्ञान, जैव विविधता विज्ञान और पर्यावरण शासन में मूलभूत योगदान दिया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त गाडगिल ने IISc, बेंगलुरु में सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की स्थापना की। भारत के पहले जैवमंडल रिजर्व — नीलगिरि जैवमंडल रिजर्व — के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रारूपण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) की अध्यक्षता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते थे। इसकी 2011 की 'गाडगिल रिपोर्ट' ने पश्चिमी घाट के लगभग 64% हिस्से को पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी। उन्हें पद्मश्री, वोल्वो पर्यावरण पुरस्कार और टायलर पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले। जन जैव विविधता रजिस्टर (PBR) पर उनके काम ने पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को मुख्यधारा के संरक्षण विज्ञान से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया।