नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo — जिसकी घरेलू बाजार हिस्सेदारी 60% से अधिक है — को 2 दिसंबर 2025 को शुरू हुए गंभीर शेड्यूलिंग संकट के बीच अपनी शीतकालीन उड़ान अनुसूची 5% (लगभग 110-115 दैनिक उड़ानें) घटाने का आदेश दिया। यह संकट DGCA द्वारा अनिवार्य उड़ान दल की नई समय-सीमाओं के साथ IndiGo के तालमेल न बैठा पाने के कारण पैदा हुआ, जिससे दस दिनों में लगभग 4,500 उड़ानें रद्द हुईं। नवंबर में 951 उड़ानें रद्द होने के बाद स्थिति और बिगड़ी, जब DGCA ने कटौती 10% कर दी। इस व्यवधान ने सर्दियों के चरम यात्रा सीजन में हजारों यात्रियों को भारतीय हवाई अड्डों पर फँसा दिया। IndiGo प्रतिदिन लगभग 2,200-2,300 उड़ानें संचालित करती है। यह संकट भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र की प्रणालीगत कमियों को सामने लाता है — बेड़ा तेजी से बढ़ा, पर उसी अनुपात में क्रू प्रशिक्षण क्षमता नहीं बढ़ी।
DGCA ने इंडिगो को उड़ानें 5% घटाने का आदेश दिया: उड़ान समय-सारणी गड़बड़ाने से हजारों यात्री फँसे
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo — जिसकी घरेलू बाजार हिस्सेदारी 60% से अधिक है — को 2 दिसंबर 2025 को शुरू हुए गंभीर उड़ान-समय निर्धारण संकट के बीच अपनी शीतकालीन उड़ान अनुसूची 5% (लगभग 110-115 दैनिक उड़ानें) घटाने का आदेश दिया। यह संकट DGCA द्वारा अनिवार्य नई फ्लाइट क्रू समय सीमाओं के अनुरूप खुद को ढालने में IndiGo की विफलता से पैदा हुआ, जिससे दस दिनों में लगभग 4,500 उड़ानें रद्द हुईं। नवंबर में 951 रद्दीकरण के बाद DGCA ने कटौती 10% कर दी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस व्यवधान के कारण शीतकालीन यात्रा के सबसे व्यस्त समय में हजारों यात्री भारतीय हवाई अड्डों पर फँस गए। IndiGo प्रतिदिन लगभग 2,200-2,300 उड़ानें संचालित करती है। यह संकट भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र की प्रणालीगत कमियों को सामने लाता है — यानी क्रू प्रशिक्षण क्षमता में समानुपाती बढ़ोतरी किए बिना बेड़े का तेज विस्तार।
मुख्य तथ्य
- DGCA ने IndiGo को शीतकालीन उड़ान अनुसूची 5% यानी लगभग 110-115 दैनिक उड़ानें घटाने का आदेश दिया।
- IndiGo ने नवंबर 2025 में 951 उड़ानें रद्द कीं, जो सबसे खराब मासिक आँकड़ा था।
- संकट बढ़ने पर DGCA ने बाद में कटौती दोगुनी कर 10% कर दी।
- इस संकट के कारण शीतकालीन यात्रा और विवाह सीज़न की चरम अवधि में हज़ारों यात्री फँस गए।
- IndiGo 60%+ घरेलू बाज़ार हिस्सेदारी के साथ लगभग 2,200-2,300 दैनिक उड़ानें संचालित करती है।
- इस प्रकरण में बिना आनुपातिक चालक दल प्रशिक्षण के बेड़ा विस्तार की प्रणालीगत कमियाँ सामने आईं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दिसंबर 2025 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा इंडिगो की शीतकालीन अनुसूची में कटौती के आदेश से सामने आए नियामक एवं प्रणालीगत मुद्दों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने 60 प्रतिशत से अधिक घरेलू हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो को 2 दिसंबर 2025 से शीतकालीन अनुसूची 5 प्रतिशत घटाने — यानी 2,200-2,300 दैनिक उड़ानों में से 110-115 — का आदेश दिया, क्योंकि दस दिनों में 4,500 रद्दीकरण हुए। बाद में 10 प्रतिशत कटौती से क्रू-रोस्टरिंग की विफलताएँ सामने आईं।
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डीजीसीए ने दिसंबर 2025 में शुरुआत में इंडिगो को उड़ानों में कितने प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया?
DGCA ने दिसंबर 2025 में शेड्यूलिंग संकट के बीच IndiGo को शुरू में 5% उड़ानों में कटौती का आदेश दिया।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिसंबर 2025 में शुरू हुए शेड्यूलिंग संकट के कारण DGCA ने IndiGo के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
DGCA ने IndiGo को अपनी शीतकालीन उड़ान अनुसूची 5% (लगभग 110-115 दैनिक उड़ानें) घटाने का आदेश दिया, और बाद में संकट बढ़ने पर इसे दोगुना करके 10% कर दिया।
दिसंबर 2025 में IndiGo के शेड्यूलिंग संकट का मूल कारण क्या था?
संकट इसलिए पैदा हुआ क्योंकि IndiGo DGCA द्वारा अनिवार्य नई उड़ान दल समय-सीमाओं के अनुरूप अपना परिचालन ढालने में विफल रहा, जिससे दस दिनों में लगभग 4,500 उड़ानें रद्द हुईं।
भारत के घरेलू विमानन बाज़ार में IndiGo की हिस्सेदारी क्या है?
भारत के घरेलू विमानन बाज़ार में IndiGo की 60% से अधिक हिस्सेदारी है और यह रोज़ लगभग 2,200-2,300 उड़ानें संचालित करती है, इसलिए यह भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है।
IndiGo के शेड्यूलिंग संकट से कौन-सी प्रणालीगत समस्या सामने आई?
इस संकट से यह प्रणालीगत कमी सामने आई कि बेड़े का विस्तार चालक दल के प्रशिक्षण में उसी अनुपात की बढ़ोतरी के बिना किया गया, जिससे स्पष्ट है कि एयरलाइन की तीव्र वृद्धि के साथ पर्याप्त मानव संसाधन नियोजन भी आवश्यक है।
नवंबर 2025 में IndiGo की कितनी उड़ानें रद्द दर्ज हुईं?
नवंबर 2025 में IndiGo की 951 उड़ानें रद्द दर्ज हुईं। यह उसका सबसे खराब मासिक आँकड़ा था और DGCA के नियामक हस्तक्षेप का प्रमुख कारण बना।
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