विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (CSE) और Down To Earth ने अनिल अग्रवाल संवाद 2026 में स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट (SOE) 2026 रिपोर्ट जारी की, जो 1982 में पहली बार प्रकाशित वार्षिक प्रमुख पर्यावरण आकलन है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि मानवीय गतिविधियों के कारण नौ में से सात ग्रहीय सीमाएं अब पार हो चुकी हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैवमंडल अखंडता, भूमि प्रणाली परिवर्तन, ताजे जल की कमी, जैव-भूरासायनिक प्रवाह, नवीन इकाइयां और महासागर अम्लीकरण शामिल हैं, जो तेज होती पारिस्थितिकी क्षति का संकेत देते हैं। चरम मौसम पर रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में 1 जनवरी से 30 नवंबर 2025 तक 334 में से 331 दिन चरम मौसम घटनाएं दर्ज की गईं। इसका अर्थ है कि लगभग 99 प्रतिशत दिनों में देश में कहीं न कहीं कम से कम एक चरम घटना हुई। 2025 में इन घटनाओं में कम से कम 4,419 लोगों की जान गई, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक आवृत्ति और प्रभाव है। रिपोर्ट वायु गुणवत्ता निगरानी में बड़े अंतराल को रेखांकित करती है। इसके अनुसार भारत की केवल लगभग 15 प्रतिशत आबादी निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन के 10 किलोमीटर के भीतर रहती है, जिससे लगभग 85 प्रतिशत या 1.2 अरब से अधिक लोग मापन योग्य निगरानी क्षेत्रों से बाहर हैं। रिपोर्ट बढ़ते बाघ हमलों को आवास दबाव, बढ़ती बाघ आबादी और जंगलों तथा बाघ क्षेत्रों के पास अधिक मानव बस्तियों से जोड़ती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष तीव्र हो रहा है। SOE 2026 इस बात पर बल देती है कि भारत को तेज गर्मी और पारिस्थितिकी तनाव का सामना करने के लिए मजबूत जलवायु अनुकूलन, विस्तृत पर्यावरण निगरानी अवसंरचना और संघर्ष शमन की तत्काल आवश्यकता है।